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Written By WD

मैंने देखा एक बोनसाई

युवा चाहते है निर्णय की आजादी

सुधा मूर्ति
- सुधा मूर्ति

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पिछले अंक का शेष भाग .....

मैं अकेले चुपचाप बैठी रही अँधेरे में बिना खाए निद्राहीन महसूस कर रही थी। मैं सोच रही थी कि पुनीत के माता-पिता भी अजीब हैं?

वे भूल गए हैं कि पुनीत एक स्वतंत्र तरुण है जिसे स्वयं निर्णय लेना चाहिए। परंतु अधिक प्यार एवं सहारे से वह कभी भी आत्मविश्वासी व्यक्ति नहीं बन सकेगा।

रात के दस बजे थे। मैं कभी इतनी जल्दी नहीं सोती। धुँधले अँधेरे में भी मैं सामने आते व्यक्ति को पहचानने की कोशिश कर रही थी। वह मेरी दोस्त थी, हम दोनों एक-दूसरे को देखकर बहुत खुश हुए।

उसने कहा- तुम रात को यहाँ पर क्यों बैठी हुई हो। मेरे साथ चलो बातचीत करेंगे। बेंगलुरू में तुमसे मुलाकात नहीं होती है। मैंने कहा- मेरे पास आरक्षण केवल इस सीट के लिए है।

मेरी दोस्त ने कहा कि कोई बात नहीं, मेरे कम्पार्टमेंट में एक बर्थ खाली है।
टिकट कलेक्टर से बात कर लेंगे। यह सुनकर मैं उसके साथ चली गई।

  स्वतंत्रता! जिंदगी की हर राह में स्वतंत्रता से सब कुछ चुनना। जिस क्षेत्र में हमारी रूचि हो उस क्षेत्र में काम करते करना चाहिए। मैं अपने आपको बहुत ही भाग्यशाली समझता हूँ कि मुझमें स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता है।      
उसके कम्पार्टमेंट में उल्लासभरा माहौल था। मेरी दोस्त एवं अन्य सहेलियाँ हँस-हँस कर बातचीत कर रही थीं।

हमारे बीच एक नौजवान बैठा हुआ था। वह जोशीला एवं हँसमुख था। जब हम सबने अपने-अपने टिफिन खोले तो उसने सभी को थैली में से केले निकालकर दिए।

मैंने उससे पूछा- तुम्हारा नाम क्या है? तुम कहाँ जा रहे हो?
उसने कहा- मेरा नाम शरद है, मैं बैलगाँव जा रहा हूँ।

तुम वहाँ क्यों जा रहे हो?
मुझे मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला है, मैं वहाँ पढ़ने जा रहा हूँ।

मैंने पूछा - क्या तुम पहली बार जा रहे हो? क्या तुम्हारे साथ कोई जा रहा है?
जी हाँ, मैं वहाँ पहली बार जा रहा हूँ और अकेला हूँ।

उसकी बात सुनकर मैं अपना खाना भूल गई थी। अचानक पुनीत के बारे में सोच रही थी जिसकी उम्र इसी लड़के के समान थी।

  हमेशा बीच के रास्ते को अपनाना चाहिए। इसलिए किसी एक क्षेत्र पर ध्यान न केंद्रित कर सभी क्षेत्रों में अपनी रूचि बढ़ानी चाहिए। हर व्यक्ति को संगीत, खेल एवं तैरना आना चाहिए। मैं एनसीसी में था इसलिए मैंने कई जगहों की यात्रा की है।      
मैंने पूछा- तुम्हारे माता-पिता कहाँ हैं? क्या तुम्हारे संग कोई सफर कर रहा है?
मेरे पिता डाकिया हैं एवं मेरी माँ स्कूल की अध्यापिका। मैं अकेला हूँ। मैं कोलार गाँव के नजदीक से आ रहा हूँ।

मैंने पूछा- तुम्हारे कितने भाई-बहन हैं।
उसने कहा- मैं माता-पिता का एकमात्र पुत्र हूँ। क्या तुम्हें अकेलापन नहीं लगता?

नहीं, जब मेरे माता-पिता काम पर जाते थे तब स्कूल समाप्त होने के बाद मैं पड़ोसियों से मिलता था एवं पड़ोसियों के बच्चे मेरे दोस्त थे। हर दिन मैं एक घर मिलने जाता था। उसने कौन-कौन से विषय स्कूल में पढे हैं यह जानने की मेरी जिज्ञासा बढ़ गई।

उसने बताया- मेरे पिता डाकिया हैं इसलिए कम उम्र में ही साइकिल चलाना सीख लिया था। शाम को मैं अन्य कार्य करने में व्यस्त रहता था। मेरे पिता ने कहा कि जिंदगी में एक ही चीज पर ज्यादा ध्यान देना बहुत खराब है।

हमेशा बीच के रास्ते को अपनाना चाहिए। इसलिए किसी एक क्षेत्र पर ध्यान न केंद्रित कर सभी क्षेत्रों में अपनी रूचि बढ़ानी चाहिए। हर व्यक्ति को संगीत, खेल एवं तैरना आना चाहिए। मैं एनसीसी में था इसलिए मैंने कई जगहों की यात्रा की है।

तुम्हारा परीक्षाफल कैसा रहा? अच्छा, मुझे बैलगाँव मेडिकल कॉलेज में सीट मिली है। क्या यह जगह बहुत महँगी नहीं हैं?

महँगी तो है, मेरे माता-पिता ने बहुत त्याग किए हैं। बैंक से मैंने ऋण लिया है। मुझे विश्वास है कि नौकरी मिलते ही मैं ऋण वापस कर दूँगा। मैंने पूछा कि एक युवा व्यक्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज क्या है?

उसने कहा - स्वतंत्रता! जिंदगी की हर राह में स्वतंत्रता से सब कुछ चुनना। जिस क्षेत्र में हमारी रूचि हो उस क्षेत्र में काम करते करना चाहिए। मैं अपने आपको बहुत ही भाग्यशाली समझता हूँ कि मुझमें स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता है।

जिस तरह जंगल में पेड़ स्वतंत्रता से बड़े हो जाते हैं। मैं सोच रही थी अभी मैंने एक छोटा सा बोनसाई पेड़ ट्रेन में देखा है।
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WD