दिल्ली दौरे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,कैबिनेट विस्तार को लेकर अटकलें तेज

Author विकास सिंह| पुनः संशोधित गुरुवार, 10 जून 2021 (14:19 IST)
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पिछले एक पखवाड़े से सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा में जारी घमासान के बीच आज अचानक दिल्ली दौरे पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने का कार्यक्रम बताया जा रहा है।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री और केंद्रीय नेतृत्व की बीच सब कुछ ठीक-ठाक नहीं होने की खबरों के बीच योगी आदित्यनाथ के दिल्ली जाकर केंद्रीय नेताओं से मिलने की खबर ने एक बार फिर सियासी पारे को गर्मा दिया है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिल्ली रवाना होने से पहले उनकी पार्टी प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री के साथ बैठक भी हुई है।
वहीं राजनीति के जानकार मुख्यमंत्री के इस दौरे विधानसभा चुनाव से पहले की तैयारियों और आने वाले समय में कैबिनेट विस्तार से भी जोड़कर देख रहे है। वर्तमान योगी सरकार में 53 मंत्री हैं। जिनमें 23 कैबिनेट मंत्री, 9 स्वतंत्र प्रभार मंत्री और 21 राज्यमंत्री हैं। वहीं योगी सरकार में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस प्रकार सरकार में सात मंत्रियों के पद खाली हैं। अब जब विधानसभा चुनाव में 6-8 महीने का बाकी बचा है तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी सरकार में कुछ नए चेहरों को शामिल कर सियासी समीकरण को साधने का दांव चल सकते हैं।
प्रदेश में 19 मार्च 2017 को सरकार बनने के बाद मंत्रिमंडल का पहला विस्तार 22 अगस्त 2019 को हुआ था। पहले मंत्रिमंडल विस्तार में तीन नए चेहरों के साथ राज्यमंत्री को मिलाकर 6 स्वतंत्र प्रभार मंत्रियों को शपथ दिलाई गई थी और 11 विधायक को राज्य मंत्रियों को उत्तर प्रदेश सरकार में जगह दी गई थी। वहीं कोरोना वायरस के संक्रमण से तीन मंत्रियों का निधन हो चुका है। चेतन चौहान और कमला रानी वरुण के बाद हाल ही में राज्यमंत्री विजय कुमार कश्यप का निधन हो गया है।

उत्तर प्रदेश में अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है और इसी को लेकर यूपी का सियासी पारा गर्माया हुआ है। पिछले दिनों उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी
के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का बधाई नहीं देना काफी सुर्खियों में था। इसके बाद सियासी गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या योगी और मोदी के बीच सब ठीक है।




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