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मोमिन की ग़ज़लें
1.
न कटी हम से शब जुदाई की कितनी ही ताक़त आज़माई कीरश्क-ए-दुश्मन बहाना था सच हैमैं ने ही तुम से बेवफ़ाई कीक्यों बुरा कहते हो भला नासेह मैंने हज़रत से क्या बुराई की गर न बिगड़ो तो क्या बिगड़ता है मुझ में ताक़त नहीं लड़ाई कीमर गए पर है बेख़बर सय्याद अब तवक़्क़ो नही रिहई कीदिल हुआ ख़ूँ ख़्याल-ए-नाख़ुन-ए-यार तूने अच्छी गिरह कुशाई कीमोमिन आओ तुम्हें भी दिखला दूँ सैर बुतख़ाने में ख़ुदाई कीकठिन शब्दों के अर्थ रश्क-ए-दुश्मन ----दुशमन से जलन नासेह -------नसीहत करने वालासय्याद -----शिकारी, क़ैद करने वालातवक़्क़ो-----आशा, उम्मीद ख़्याल-ए-नाख़ुन-ए-यार ---दोस्त के नाख़ुन का ख़्याल 2.
ये हालत है तो क्या हासिल बयाँ से कहूँ कुछ और कुछ निकले ज़ुबाँ से मेरा बचना बुरा है आप ने क्यों अयादत की लब-ए-मोजिज़ बयाँ से वो आए हैं पशेमाँ लाश पर आप तुझे ऎ ज़िन्दगी लाऊँ कहाँ से न बिजली जलवा फ़रमा है न सय्याद निकल कर क्या करें हम आशयाँ से जहाँ से तंगतर जन्नत न होजाए बहुत हसरत भरा जाता हूँ याँ से ख़ुदा की बेनियाज़ी हाय मोमिनहम ईमाँ लाए थे नाज़-ए-बुताँ से कठिन शब्दों के अर्थ अयादत करना---बीमार के हाल-चाल पूछनामोज़िज़----इज़्ज़तदार, इज़्ज़तवालापशेमाँ------शर्मिनदा तंगतर ----ज़्यादा तंग ईमाँ -----ईमान नाज़ेबुताँ -----हसीनों के नाज़-नख़रे
3.
करता है क़त्लेआम वो अग़यार के लिए दस-बीस रोज़ मरते हैं दो-चार के लिएदेखा अज़ाब-ए-रंज दिल-ए-ज़ार के लिए आशिक़ हुए हैं वो मेरे आज़ार के लिए ले तू ही भेज दे कोई पैग़ामे-ए-तल्ख़ अब तजवीज़ ज़ेहर है तेरे बीमार के लिए आता नही है तू तो निशानी ही भेज दे तसकीन-ए-इज़तेराब-ए-दिल-ए-ज़ार के लिए चलना तो देखना के क़यामत ने भी क़दम तर्ज़-ए-ख़िराम-ओ-शोख़ि-ओ-रफ़्तार के लिए जी में है मोतियों की लड़ी उसको भेज दूँ इज़हार-ए-हाल-ए-चश्म-ए-गोहरबार के लिए देता हूँ अपने लब को भी गुलरंग की मिसाल बोसे जो ख़्वाब में तेरे रुख़्सार के लिए जीना उमीद-ए-वस्ल पे हिजराँ में सेह्ल था मरता हूँ ज़िन्देगानिएदुश्वार के लिए कठिन शब्दों के अर्थ अग़यार------दूसरे लोग,पराएदिल-ए-ज़ार---परेशान दिल आज़ार-----मुसीबत, दुख पैग़ाम-ए-तल्ख़------कठोर शब्दों का बखान तजवीज़---सुझाव तस्कीन-ए-इज़तेराब-ए-दिल-ए-ज़ार---बेचैन और बेक़रार दिल की तसल्ली के लिएतर्ज़-ए-ख़िराम-ए-शोख़ि-ए-रफ़्तार-----उनके चलने की गति और चंचलताइज़हार-ए-हाल-ए-चश्म-ए-गोहरबार-- आँसूओं की झड़ी लगाती हुई आँख का हाल उमीद-ए-वस्ल-----मिलन की आस हिजराँ----जुदाई, सेह्ल-----सरल, आसान ज़िन्देगानिएदुशवार----मुसीबतों से भरी हुई ज़िन्दगी