GST में अभी भी हैं 4 बड़ी परेशानियां, क्या बजट में मिलेगी राहत

Author सीए भरत नीमा|
लागू हुए 2 साल से ज्यादा समय हो गया पर अभी भी लोगों को इससे जुड़ी परेशानियों से निजात नहीं मिली है। आइए जानते हैं GST से जुड़ी 4 बातें, जो लोगों को परेशान कर रही हैं। लोगों को उम्मीद है कि मोदी सरकार 2 के पहले में इन समस्याओं से मुक्ति मिलेगी।

1. नया कानून और कठिन कंप्लायंस और अत्यधिक संशोधन होने की वजह से return भरने में लोगों से कई गलतियां हुईं, जो कि जानबूझकर नहीं की गई। इस वजह से रिटर्न भरने में देरी भी हुई। GST कानून के अनुसार ब्याज की लायबिलिटी उस राशि पर डिमांड हो रही है जो कि उस माह की बिक्री पर टैक्स बनता है।

दूसरी ओर लॉजिक यह कहता है की ब्याज की लायबिलिटी पिछला ITC बैलेंस और वर्तमान माह का इनपुट टैक्स क्रेडिट घटने के बाद जो बैलेंस राशि बचती है उस पर ब्याज लिया जाना चाहिए। वर्तमान में GST डिपार्टमेंट ने ब्याज की डिमांड के कई नोटिस इश्यू कर दिए हैं जो कि लोगों को परेशानी में डाल रहे हैं। मतलब लोगों को अपने ही जमा पैसों पर 18% पर ब्याज भरना पड़ रहा है।

2. रिफंड पर सरकार 6% ब्याज देती है, लेकिन रिटर्न में देरी या गलती के कारण 18% से 24% तक ब्याज वसूल करती है तो क्यों ना इसी ब्याज की राशि में पेनल्टी भी मान ली जाए। इस पर अलग से पेनल्टी क्यों? ब्याज की दर को 12% करना चाहिए।

3. कमर्शियल क्रेडिट नोट जो की कंपनी डीलर को वर्ष के आखरी में टारगेट सेल्स पर देती है। इस पर कंपनी जो क्रेडिट नोट दे रही है उस पर GST वापस नहीं ले रही है। यह कानूनन सही है, लेकिन जिसको यह राशि टारगेट सेल की आय के रूप में आ रही है वे लोग बहुत परेशान हैं।

4. सरकारी कांट्रेक्टर को टाइम ऑफ सप्लाई तय करने में दुविधा : GST कानून और बिल पास करने की प्रक्रिया में अंतरविरोध दिखाई देता है। सरकारी काम करने वाले कांट्रेक्टर के केस में बिल पास कराने के लिए वर्षों पुराना प्रोसेस है जिसमें ठेके के बीच में जितना काम हुआ उसका पेमेंट ठेकेदार लेने का हकदार होता है। इस प्रक्रिया में लगने वाला समय तय नहीं रहता है। कभी-कभी 2 से 3 माह भी लग जाते हैं। सरकार कांट्रेक्टर से बिल नहीं लेती है। इधर कांट्रेक्टर को GST कानून के अंतर्गत अपनी सप्लाई बताने के लिए बिल नंबर देना जरूरी है।

चूंकि सरकारी भुगतान में समय लगता है और GST भरने की तारीख पहले आ जाती है जिससे ठेकेदार का पैसा GST भरने में भी एडवांस में लग जाता है। पैसा सरकार से आना बाकी रहने से ठेकेदार मजबूरी में रिटर्न पैसा प्राप्ति होने तक रिटर्न नहीं भरता है और उसे जबरन ब्याज लग जाता है।

इस संदर्भ में सरकार को पेमेंट प्राप्त करने की तारीख को ही सप्लाई की तारीख मानने के लिए विशेष संशोधन धारा 13(2)(b) में या स्पष्टीकरण लाना चाहिए और सरकारी विभाग को बिल लेने के लिए आदेश देना चाहिए। दोनों विभाग को आपस में बैठकर सभी की सुविधानुसार नियमों में संशोधन करना अत्यंत जरूरी जान पड़ता है। चूंकि नया कानून होने से सभी लोग अपनी-अपनी तरह से इसे समझकर लागू कर रहे हैं।


 

और भी पढ़ें :