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Written By UN News
Last Modified: गुरुवार, 28 मई 2026 (17:48 IST)

डीआर कांगो : हिंसा के साए में इबोला का प्रकोप, भयावह स्थिति पर गहरी चिंता

World Health Organization Issues Warning Regarding Ebola Virus
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने आगाह किया है कि इबोला वायरस को झेल रहे कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) के पूर्वी हिस्से में बीमारी और हिंसक टकराव एक साथ मिलकर भयावह स्थिति पनपने की वजह बन रहे हैं। देश के इतूरी प्रांत में संक्रमण मामलों का फैलाव उन पर नियंत्रण पाने की तुलना में कहीं अधिक तेज़ गति से हो रहा है।
 
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी प्रमुख के अनुसार, पहले से ही हिंसक टकराव, सामूहिक विस्थापन और भूख संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे डीआरसी के पूर्वी हिस्से में इबोला वायरस पर क़ाबू पाना कठिन साबित हो रहा है। इबोला का बुंडिबुग्यो प्रकार एक ऐसे माहौल में फैल रहा है, जहां असुरक्षा व्याप्त है, स्वास्थ्य केन्द्रों पर हमले हुए हैं और आबादी की आवाजाही के कारण संदिग्ध संक्रमण मामलों और संक्रमितों के सम्पर्क में आए लोगों का पता लगाना और उन्हें अलग रखना कठिन हो रहा है।
इबोला के बुंडिबुग्यो प्रकार का पहला मामला, युगांडा में 2007 में दर्ज किया गया था, लेकिन इसके लिए अब भी कोई उपचार या वैक्सीन को स्वीकृति नहीं मिली है।
 

तेज़ी से बढ़ता दायरा

डीआरसी में स्वास्थ्य एजेंसियों के अनुसार, देश में इबोला के क़रीब एक हज़ार संदिग्ध संक्रमण मामले हैं और 220 से अधिक संदिग्ध मौतें हुई हैं, हालांकि प्रयोगशाला में केवल एक मौत की ही पुष्टि हुई है। वहीं पड़ोसी देश युगांडा में स्वास्थ्य प्रशासन ने इबोला बीमारी से सम्बन्धित सात संक्रमण मामलों की पुष्टि की है, जिनमें दो स्वास्थ्यकर्मी भी हैं। एक व्यक्ति की मौत हो गई है।
 
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इबोला का प्रकोप, भौगोलिक रूप से अपने पांव पसार रहा है और साक्ष्य दर्शाते हैं कि यह सीमा पार भी फैल रहा है। मुख्यत: यह वायरस अभी पूर्वी डीआरसी के इतूरी प्रान्त में ही केन्द्रित है, लेकिन 11 स्वास्थ्य ज़ोन में फैल चुका है। गोमा और बुटेम्बो इलाक़ों समेत उत्तर किवू और दक्षिण किवू प्रान्तों में भी इसके मामले सामने आए हैं। 
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, यह वायरस परिवारों में आपस में और स्वास्थ्य केन्द्रों के ज़रिए फैल रहा है। देखभाल प्रदान करने वाले लोगों, पारिवारिक आयोजनों और असुरक्षित ढंग से अन्तिम संस्कार की प्रक्रिया के कारण संक्रमण मामले दर्ज किए गए हैं।  
 

युद्धविराम की अपील

महानिदेशक टैड्रॉस ने कहा कि इबोला के फैलाव को रोकना पूरी तरह से मानवीय सहायता मार्ग की उपलब्धता पर ही निर्भर है। मगर झड़पों के जारी रहने से सामूहिक विस्थापन हो रहा है, संक्रमितों के सम्पर्क में आए लोग भीड़भाड़ वाले शिविरों में जा रहे हैं और संक्रमण पर क़ाबू पाने के उपाय बेअसर हो रहे हैं।
 
अग्रिम पंक्ति के कर्मचारी सबकुछ दांव पर लगा रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य केन्द्रों पर हमले से मामलों की निगरानी रखना और उनके सम्पर्क में आए लोगों का पता लगाना लगभग असम्भव होता जा रहा है। जब बम गिर रहे हों, तो हम न तो सामुदायिक भरोसे का निर्माण कर सकते हैं और न ही बीमारों को अलग रखने की व्यवस्था।
 
इसके मद्देनज़र उन्होंने चिकित्सा दलों के लिए सुरक्षित व निरन्तर मार्ग मुहैया कराने की अपील की है। WHO प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा है कि हर किसी बात से पहले मानव रक्षा को प्राथमिकता दी जानी होगी। 

हिंसा ने बढ़ाई कठिनाई

इबोला से प्रभावित क्षेत्र, डीआरसी में हिंसक टकराव से भी पीड़ित हैं, जहां सशस्त्र गुटों के दबदबे के कारण मानवीय सहायता पहुंचाना बहुत चुनौतीपूर्ण है।
 
यूएन शान्तिरक्षा मिशन ने वर्ष 2025 में अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि इतूरी और उत्तर किवू में हिंसा की निरन्तर घटनाएं हुई हैं, जिनमें गांवों, स्वास्थ्य केन्द्रों, विस्थापित समुदायों पर हमले भी हैं, जो कि सैकड़ों लोगों के मारे जाने और विस्थापित होने की वजह बने हैं। 
लड़ाई और सशस्त्र गुटों द्वारा थोपी गई पाबन्दियों की वजह से मानवीय सहायता पहुंचाने में भी अवरोधों का सामना करना पड़ता है, आम नागरिकों की आवाजाही कम है और अति आवश्यक सेवाओं की सुलभता पर भी असर हुआ है। एक अनुमान के अनुसार, पूर्वी डीआरसी के इतूरी, उत्तर किवू, दक्षिण किवू समेत अन्य प्रांतों में लगभग एक करोड़ लोगों के पास भरपेट भोजन की व्यवस्था नहीं है।
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