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DRC : इबोला वायरस से उपजे संकट पर नियंत्रण प्रयासों में जुटी यूएन एजेंसियां

UN Agencies Engaged in Efforts to Contain Crisis Caused by Ebola Virus
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के पूर्वी हिस्से में इबोला वायरस के प्रकोप पर नियंत्रण पाने के लिए तेज़ी से प्रयास कर रही हैं और प्रभावित इलाक़ों में आपात चिकित्सा सामग्री, बचाव उपकरणों समेत हरसम्भव समर्थन मुहैया कराया जा रहा है। 
 
डीआरसी में अब तक 139 लोगों के मारे जाने की ख़बर है और संक्रमण के लगभग 600 संदिग्ध मामले हैं। वहीं युगांडा में दो मामलों की पुष्टि हुई है। 50 वर्ष पहले इबोला वायरस के मामले पहली बार दर्ज किए गए थे, जिसके बाद से अब तक डीआरसी ने इबोला का 17 बार सामना किया है। 
फ़िलहाल, इसके प्रकोप के लिए बुंडिबुग्यो नामक प्रजाति ज़िम्मेदार है, जो कि दुर्लभ है और इसकी रोकथाम के लिए कोई वैक्सीन या उपचार के लिए कोई दवा मौजूद नहीं है। यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने पहले ही इस वायरस के फैलाव को अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित कर दिया है, जिसके लिए देशों को समन्वित ढंग से कार्रवाई में जुटना आवश्यक है। हालांकि यह वैश्विक महामारी जैसी आपात स्थिति नहीं है।
 
यूएन की टीम, डीआरसी के पूर्वी हिस्से और युगांडा में स्वास्थ्य एजेंसियों के साथ मिलकर इबोला की बुंडिबुग्यो प्रजाति के जानलेवा फैलाव को रोकने और जोखिम वाले इलाक़ों में तैयारी व जागरूकता के लिए मुस्तैद हैं। 
 

चिकित्सा सामान की आपूर्ति

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने राजधानी किंशासा और सेनेगल व केनया में क्षेत्रीय केन्द्रों से 11.5 टन मेडिकल सामान और उपकरण रवाना किए हैं। इनमें निजी बचाव उपकरण, मेडिकल किट, टैंट समेत अन्य सामान हैं। साथ ही, संक्रमण को टालने और संक्रमितों की कारगर ढंग से देखभाल के लिए जल, साफ़-सफ़ाई और अन्य स्वच्छता सामग्री भी मुहैया कराई गई है।  
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा है कि साझीदार संगठनों और निजी सेक्टर के साथ पारस्परिक सहयोग मौजूदा स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए अहम है। डीआरसी में यूएन शान्तिरक्षा मिशन (MONUSCO) ने भी सरकारी और यूएन एजेंसियों को समर्थन प्रदान करने के लिए वायु सेवा की व्यवस्था की है, जिसके तहत केनया की राजधानी नैरोबी से इतूरी प्रांत की राजधानी बुनिया में आपात सामान पहुंचाया जा रहा है।
 
इसके समानान्तर, यूएन शान्तिरक्षा स्थानीय समुदायों में जागरुकता फैलाने के प्रयास भी कर रहे हैं, जहां लोगों को रोकथाम उपायों, स्वच्छता बरतने और अन्य जोखिमो के बारे में समझाया जा रहा है।
 

भूख संकट के साथ स्वास्थ्य आपदा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WFP) ने चेतावनी दी है कि डीआरसी के पूर्वी हिस्से में पहले से ही गम्भीर मानवीय स्थिति थी, जहां पिछले कई दशकों से हथियारबंद गुटों की सक्रियता रही है। मगर इबोला के प्रकोप ने इस स्थिति को और जटिल बना दिया है।
ये चुनौतियां एक ऐसे समय में गहरा रही हैं, जब देशभर में 2.65 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। इनमें 1 करोड़ लोग इतूरी प्रान्त में हैं, जबकि तीन अन्य प्रांतों में भी हिंसक टकराव और विस्थापन की वजह से जटिल हालात हैं। इतूरी में लगभग 17 लाख लोग यानी स्थानीय आबादी के एक तिहाई से अधिक, संकट या उससे भी ख़राब स्तर पर भूख संकट का सामना कर रहे हैं। 
 

सहायता पहुंचाना अहम

यूएन एजेंसी ने बताया है कि WFP के अभियान संचालन का मुख्य केन्द्र अब एक स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है और इस वजह से उसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। 'हम अनेक मोर्चों पर महत्वपूर्ण सहायता मुहैया करा रहे हैं, जिनमें अग्रिम पांत के स्वास्थ्यकर्मियों को समर्थन भी है ताकि वे सुरक्षित ढंग से जवाबी कार्रवाई को बढ़ा सकें।'
WFP ने दुर्गम और दूरदराज़ के इलाक़ों में मानवीय सहायताकर्मियों, मेडिकल सामान और अन्य सामग्री पहुंचाने के लिए व्यवस्था की है। साथ ही, मरीज़ों, जीवित बचे व्यक्तियों, उनके संपर्क में आए लोगों और प्रभावित परिवारों के लिए खाद्य व पोषण सहायता सुनिश्चित की गई है। डीआरसी में अपने अभियान को मज़बूती देने के लिए WFP को 21 करोड़ डॉलर की आवश्यकता है, जिसमें से एक करोड़ डॉलर इबोला से निपटने के लिए हैं। 
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