1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. टॉप न्यूज़
  4. super-el-nino-india-weather-forecast-below-normal-monsoon-heatwave-drought

सावधान! 'सुपर एल-नीनो' तोड़ेगा गर्मी के सारे रिकॉर्ड; सूखे और कमजोर मानसून का खतरा

super el nino threat in india
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली समेत कई राज्य इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। देश पर ‘सुपर एल-नीनो’ का खतरा मंडरा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल का अल नीनो कोई आम मौसमी घटना नहीं, बल्कि एक 'सुपर एल नीनो' में तब्दील होने जा रहा है। इससे मानसून के कमजोर होने के साथ भी भीषण गर्मी और सूखे के सभी रिकॉर्ड टूट सकते हैं।
 
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि एल नीनो की स्थिति मई से जुलाई के बीच विकसित हो सकती है, जिससे भारत समेत दक्षिण एशिया में मौसम पर बड़ा असर पड़ेगा। पहले अनुमान था कि यह स्थिति मानसून के दूसरे हिस्से (अगस्त-सितंबर) में बनेगी, लेकिन अब इसके जल्दी आने की संभावना जताई गई है।
 
भारत में मौसम विज्ञान विभाग पहले ही इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान दे चुका है। मौसम विभाग ने मानसून के सामान्य से 92 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। कम बारिश का सीधा असर खेती और जल संसाधनों पर पड़ेगा। भारत में करीब 70% बारिश मानसून से होती है, जिससे खेतों और जलाशयों को पानी मिलता है। अगर मानसून कमजोर रहा, तो फसल उत्पादन घटेगा, जल संकट बढ़ेगा और आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ेगा।
 

क्या है अल नीनो?

एल नीनो एक ऐसी जलवायु स्थिति है, जो हर 2 से 7 साल में आती है और करीब 9 से 12 महीने तक रहती है। इसके कारण दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तापमान और बारिश के पैटर्न बदल जाते हैं और आमतौर पर वैश्विक तापमान बढ़ता है। 
 
सामान्य दिनों में प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से में पानी ठंडा रहता है जबकि पश्चिमी हिस्से का पानी बहुत गर्म रहता है। हवाएं पूर्व से पश्चिम की तरफ चलती है। इन हवाओं ट्रेड विंड्स कहा जाता है। ये हवाएं गर्म पानी को पश्चिम की तरफ धकेलती रहती हैं। इस वजह से पूर्व में ठंडा पानी ऊपर आता रहता है। लेकिन हर 2 से 7 साल में कभी-कभी ट्रेड विंड्स यानी ये वाली हलाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इसको एल नीनो कहते हैं।
 
आमतौर पर एल नीनो के दौरान ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और भारत के कुछ हिस्सों में कम बारिश या सूखे की स्थिति बनती है। वहीं दक्षिण अमेरिका, अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों, अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों और मध्य एशिया में ज्यादा बारिश देखने को मिलती है।
 

कब बनती है सुपर अल नीनो की स्थिति

जब मध्य प्रशांत महासागर में पानी 2 डिग्री या उससे ज्यादा गर्म हो जाए तो सुपर अल नीनो की स्थिति बनती है। 1950 के बाद यह स्थिति केवल 3 बार (1982, 1997 और 2015 में) बनी है। अगर इस साल का एल नीन्यो, सुपर एल नीन्यो बन गया तो मॉनसून और भी कमजोर हो सकता है।
edited by : Nrapendra Gupta 
लेखक के बारे में
वेबदुनिया न्यूज़ टीम
वेबदुनिया न्यूज़ डेस्क पर हमारे स्ट्रिंगर्स, विश्वसनीय स्रोतों और अनुभवी पत्रकारों द्वारा तैयार की गई ग्राउंड रिपोर्ट्स, स्पेशल रिपोर्ट्स, साक्षात्कार तथा रीयल-टाइम अपडेट्स को वरिष्ठ संपादकों द्वारा सावधानीपूर्वक जांच-परख कर प्रकाशित किया जाता है।.... और पढ़ें
अगला लेख
Weather Update : देशभर में प्रचंड गर्मी का प्रकोप, कई राज्यों में पारा 45 के पार, क्‍या बारिश दिलाएगी राहत?