Aaj ka sher Rana | वो मुस्कुरा भी न पाया
मैं खुल के हँस तो रहा हूँ फ़क़ीर होते हुए,
वो मुस्कुरा भी न पाया अमीर होते हुए।
वो मुस्कुरा भी न पाया अमीर होते हुए।
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