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Written By WD

तेरी निगाह भी

तेरी निगाह भी
तेरी निगाह भी इस दौर की ज़कात हुई
जो मुस्तहिक़ है उसी तक नहीं पहुँचती है

दौर-----युग, ज़माना
ज़कात--- धनवानों का वो धन जिसमें गरीबों का हिस्सा होता है।
मुस्तहिक़----हक़दार, हिस्सेदार
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WD