जानिए सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्न

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(3) शंकु

नवरत्नों की गणना में शंकु का नाम उल्लेखनीय है। 'ज्योतिर्विदाभरण' के अतिरिक्त शंकु का उल्लेख अन्यत्र प्राप्त नहीं होता। प्रकीर्ण पद्यों में शंकु का उल्लेख शबर स्वामी के पुत्र के रूप में हुआ है। शबर स्वामी की क्षत्रिय, वैश्य, ब्राह्मण और शूद्र जाति की एक-एक पत्नी थी। उनकी क्षत्रिय पत्नी से वराहमिहिर, वैश्य पत्नी से भर्तृहरि और विक्रमादित्य, ब्राह्मण पत्नी से हरीशचन्द्र वैद्य और शंकु तथा शूद्र पत्नी से का जन्म हुआ। शबर स्वामी शबरभाष्य के र‍चयिता थे।
शंकु को विद्वान मंत्रवादिन, कुछ विद्वान रसाचार्य और कुछ विद्वान इन्हें ज्योतिषी मानते हैं। वास्तव में शंकु क्या थे, यह बताना अभी असंभव है। 'ज्योतिर्विदाभरण' के एक श्लोक में इन्हें कवि के रूप में चित्रित किया गया है। किंवदंतियों में इनका चित्रण स्त्री रूप में हुआ है। विक्रम की सभा के रत्न होने के कारण इनकी साहित्यिक विद्वता का परिचय अवश्य मिलता है।






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