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Written By WD Feature Desk
Last Updated : मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 (10:37 IST)

Guru Tegh Bahadur: गुरु तेग बहादुर जयंती, जानें सिख धर्म में उनका योगदान

गुरु तेग बहादुर जी का फोटो
Life of Guru Tegh Bahadur: गुरु तेग बहादुर जयंती सिख धर्म और भारतीय इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। यह दिन सिख धर्म के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी के जन्म और उनके अद्वितीय योगदान को याद करने के लिए मनाया जाता है। गुरु तेग बहादुर जी ने न केवल सिख धर्म को मजबूत किया बल्कि धर्म की स्वतंत्रता और मानवता के अधिकारों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने अपने जीवन को सत्य, साहस, और सेवा के लिए समर्पित किया।
 
1. 'हिन्द दी चादर' (मानवता के रक्षक)
2. बचपन
3. आनंदपुर साहिब की स्थापना
4. देशव्यापी यात्राएं और सामाजिक कार्य
5. महान शांतिदूत
6. आध्यात्मिक और दार्शनिक योगदान
 

1. 'हिन्द दी चादर' (मानवता के रक्षक)

गुरु तेग बहादुर जी का सबसे बड़ा योगदान धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना था। जब मुगल शासक औरंगजेब गैर-मुसलमानों (विशेषकर कश्मीरी पंडितों) का जबरन धर्म परिवर्तन करवा रहा था, तब गुरु जी ने उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उन्होंने औरंगजेब को चुनौती दी कि यदि वह उन्हें (गुरु जी को) परिवर्तित कर सका, तो अन्य लोग भी विचार करेंगे। उन्होंने दूसरों के धर्म और विश्वास को बचाने के लिए अपना बलिदान दे दिया, जो इतिहास में विरल है।
 

2. बचपन

उनका बचपन का नाम त्यागमल था। उनकी वीरता के कारण पिता ने नाम बदलकर 'तेग बहादुर' रखा। वे गुरु हरगोबिंद जी (छठे गुरु) और माता नानकी जी के पुत्र थे। उन्होंने भय से मुक्ति और मानवता की सेवा को लेकर प्रमुख उपदेश दिए थे। गुरु तेग बहादुर जी की जयंती हमें अन्याय के खिलाफ खड़े होने और निस्वार्थ भाव से दूसरों की सेवा करने की प्रेरणा देती है।
 

3. आनंदपुर साहिब की स्थापना

आज जो प्रसिद्ध पवित्र शहर श्री आनंदपुर साहिब है, उसकी स्थापना गुरु तेग बहादुर जी ने ही 1665 में की थी। बाद में यही स्थान 'खालसा पंथ' की जन्मस्थली बना।
 

4. देशव्यापी यात्राएं और सामाजिक कार्य

गुरु जी ने गुरु नानक देव जी की तरह दूर-दराज के क्षेत्रों की यात्राएं कीं। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने न केवल आध्यात्मिक उपदेश दिए, बल्कि कुएं खुदवाकर और प्याऊ बनवाकर सामुदायिक सेवा को बढ़ावा दिया।
 

5. महान शांतिदूत और शहादत

गुरु जी केवल एक योद्धा या आध्यात्मिक गुरु ही नहीं, बल्कि एक महान शांतिदूत भी थे। जब गुरु जी ने इस्लाम स्वीकार करने से इनकार कर दिया, तो औरंगजेब ने दिल्ली के चांदनी चौक पर 11 नवंबर, 1675 को उनका सिर कलम करवा दिया। उनके बलिदान स्थल पर आज गुरुद्वारा शीश गंज साहिब सुशोभित है। जहां उनके शरीर का अंतिम संस्कार हुआ, वहां गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब स्थित है।
 

6. आध्यात्मिक और दार्शनिक योगदान

गुरु तेग बहादुर जी ने अपनी लेखनी के माध्यम से वैराग्य, भक्ति और संसार की नश्वरता का संदेश दिया। गुरु ग्रंथ साहिब में स्थान: उनके 115 शब्द (भजन) और श्लोक गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज हैं। उनका प्रमुख संदेश यानी उन्होंने सिखाया कि व्यक्ति को न तो किसी को डराना चाहिए और न ही किसी से डरना चाहिए।
 
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