Shri Krishna 9 May Episode 7 : योगमाया का चमत्कार और कंस ने दिया क्रूर आदेश

yogmaya devi in shri krishna
अनिरुद्ध जोशी|
निर्माता और निर्देशक के श्री कृष्णा धारावाहिक के 9 मई के सातवें एपिसोड वसुदेव और देवकी को कारागार में नींद्रा में बताया जाता है जहां योगमाया प्रकट होकर अपनी माया से देवकी के गर्भ को ले जाती है।
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थोड़ी देर बाद देवकी पेट को पकड़कर उठती है और दर्द से कराहते हुए चीखती है। वसुदेव की भी आंखें खुल जाती है। वसुदेव पूछते हैं क्या हुआ? देवकी कहती है आर्य, आर्य मेरा गर्भपात हो गया। उसकी चीख सुनकर दो सैनिक भीतर आ जाते हैं।

वसुदेव कहते हैं क्या कहा गर्भपात? देवकी रोते हुए कहती हैं हां आर्य मेरा गर्भपात हो गया है। दोनों सैनिक यह सुनकर कंस के पास पहुंचकर इसकी सूचना देते हैं। यह सुनकर कंस कहता है कि यह असंभव है। कहीं ऐसा तो नहीं बालक ने जन्म लिया और उसे कहीं ओर छुपा दिया गया हो? तब पास खड़ी एक महिला कहती है कि नहीं महाराज, इतनी जल्दी जन्म नहीं हो सकता। मैं देखकर आई हूं कि देवकी का गर्भपात हो गया है। उनके शरीर से जो प्रकाश निकल रहा था वह भी नहीं रहा। यह सुनकर कंस कहता है कि ये भी विष्णु का ही छल है। यह बोलकर कंस अपने शयनकक्ष में चला जाता है।
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उधर, योगमाया रोहिणी के शयनकक्ष में पहुंचकर वह गर्भ उसके उदर में स्थापित कर देती है और वहां से चली जाती है। तब वह यशोदा के कक्ष में जाती है और सूक्ष्म रूप से यशोदा मैया को जगाकर कहती है कि मैंने अभी-अभी देवकी के उदर से उसके सातवें गर्भ का संकर्षण करके उसे रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिया है। वसुदेवजी की ये संतान अनंत शक्तिशाली और परम दिव्य है। ये महाबली संकर्षण हैं जो समस्त सुखों को देने वाले और समस्त आपदाओं से रक्षा करने वाले हैं। बड़े आदर से उनकी सेवा और लालन-पालन करना। तुम धर्मात्मा की पत्नी और आज्ञाकारी पुत्र की माता बनोगी। यह सुनकर यशोदा मैया कहती है कि हे देवी संतान सुख की लालसा अभी भी बाकी है। तब योगमाया कहती है कि तुम अपने कुलगुरु से यज्ञ कराओ तो तुम्हारी गोद भी हरी हो जाएगी।
तब योगमाया एक फूल देकर अंतरध्यान हो जाती है। फूल लेकर यशोदा मैया पुन: सूक्ष्म रूप में सो जाती है। तभी उनकी आंखें खुलती है। वह सोच में पड़ जाती है। वो फिर नंदराय को उठाती और कहती है कि अभी-अभी देवी माता आईं थीं। नंदराय कहते हैं कि तुमने कोई स्वप्न देखा होगा। वह कहती हैं कि नहीं वह कोई स्वप्न नहीं था। तब वह अपने हाथ का फूल बताती है और कहती है कि जाते हुए देवी मां ये फूल मुझे दे गईं थीं। अब नंदराय उस फूल को देखकर आश्चर्य से कहते हैं कि निश्‍चित ही तुमने देवी माता का दर्शन किया था। बाद में यशोदा देवी माता की कही सारी बात बताती हैं। यह सुनकर नंदराय आश्चर्य में पड़ जाते हैं।
तभी रोहिणी की पुकार सुनकर यशोदा और नंदराय उनके कक्ष में जाते हैं। रोहिणी रोते हुए कहती है ये देखो क्या हो रहा है मेरे उदर से एक प्रकाशसा चारों ओर फैल रहा है और मेरा उदर भी बढ़ता जा रहा है। समझ में नहीं आ रहा है कि ये कैसी घटना है। यशोदा कहती है कि यह घटना नहीं है दीदी, ये तो देवी चमत्कार है। यशोदा रोहिणी को बताती है कि ये देवकी का गर्भ है। देवी ने बताया था कि बालक का नाम संकर्षण है। रोहिणी कहती है कि कैसी अनर्गल बातें कर रही हो। भला क्या प्रमाण है इसका।
नंदराय कहते हैं कि प्रमाण है ये दिव्य तेज जो आपके उदर से निकलकर चारों और फैल रहा और दूसरा प्रमाण है यह पुष्प। तीनों इस चमत्कार को आश्चर्य से देखते हैं। लेकिन रोहिणी रोते हुए कहती है कि मैं इतने समय से यहां आपके घर पर साध्वी बनकर रह रही हूं। यहां गांव वालों को भी नहीं मालूम की मैं कुमार वसुदेव की पहली पत्नी रोहिणी हूं। ऐसी अवस्था में ये समस्या कितनी विकट है। हम सबकी कितनी निंदा हो सकती है। कौन मानेगा कि ये देवी चमत्कार है नंदराय जी।
तब नंदराय, यशोदा और रोहिणी इस समस्या को लेकर अपने गुरु शांडिल्य जी के पास जाते हैं और इसका समाधान पूछते हैं। शांडिल्य ऋषि कहते हैं कि मैं ये तो जानता हूं कि यशोदा को संतान प्राप्ति होगी लेकिन देवी रोहिणी के बारे में वृष्णीवंशी उनके कुल गुरु महर्षि गर्ग ही पूर्ण ज्ञान दे सकते हैं। फिर भी इसकी समस्या का उत्तर मैं ध्यान द्वारा ढूंढने का प्रयास करता हूं। ऐसा कहकर ऋषि अपनी कुटिया में गर्ग ऋषि का आहवान करते हैं। गर्ग ऋषि आकर बताते हैं कि जिसे विधाता ने निर्धारित किया है उसे तो मैं बता सकता हूं लेकिन जिसने ये माया रची है उसकी भविष्यवाणी मैं नहीं कर सकता। लेकिन देवताओं में ऐसी चर्चा है कि स्वयं भगवान वृष्णीवंशी के यहां अवतार लेने वाले हैं। मैं यह जानता हूं कि देवकी का सातवां गर्भ रोहिणी के गर्भ में स्थापित किया गया है। वो स्वयं भगवान शेषनाग हैं। फिर गर्ग ऋषि बताते हैं कि देवकी महर्षि कश्यप की पत्नी अदिति थी और उनकी दूसरी पत्नी कद्रू जो नागों की माता है वह रोहिणी ही है। इसीलिए भगवान शेषनाग माता रोहिणी को अपनी माता का गौरव प्रदान करने आए हैं।
बाद में महर्षि शांडिल्य रोहिणी को बताते हैं कि योगमाया ने जो जीव तुम्हारी कोख में डाला है वह दिव्य बालक है। जब देवकी के आठवें गर्भ से जगत का तारणहार प्रकट होगा तो तुम्हारा ये दिव्य बालक असुरों के विनाश में उनकी सहायता करेगा। ये तुम्हारे पति की ही संतान है। इसलिए इसे धारण करने में तुम्हारी कोई निंदा नहीं करेगा। अब तक तुम अप्रकट रूप में एक साध्वी की तरह रही हो। अब आज तुम्हें नंदरायजी प्रकट रूप में वसुदेव की रानी रोहिणी के रूप में तुम्हें गोकुल ले जाएंगे। सब लोग ये समझ लेंगे कि नंदराय तुम्हें मथुरा से निकालकर इसीलिए ले आए हैं ताकि कंस के हाथों वसुदेव की एक संतान तो बच सके। यह सुनकर रोहिणी की चिंता दूर हो जाती है।

उधर मथुरा में प्रजा के बीच देवकी के गर्भपात की चर्चा होती है। वे सोचते हैं कि अब देवकी के अगले गर्भ को सातवां गिना जाएगा या आठवां?
उधर, जेल में वसुदेव और देवकी को दु:खी मुद्रा में बताते हैं। दोनों इस पर विचार करते हैं कि ऐसा क्यूं हुआ। वसुदेव कहते हैं कि संभवत: तारणहार ने हमारी पीड़ा को समझकर जल्दी आने का सोचा हो।
इधर, नंदराय कक्ष में आकर रोहिणी व यशोदा से कहते हैं कि अभी-अभी सूचना मिली है कि कारागार में देवकी का गर्भापात हो गया है। मतलब इसका एक और प्रमाण मिल गया। यह वही रात्रि थी जिस रात्रि में देवी मां ने यशोदा को दर्शन दिए थे। रोहिणी प्रसन्न होकर कहती है कि अब यशोदा की गोद भरने के लिए ऋषि शांडिल्य से यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिए कहिए।..बाद में यज्ञ होता है।

उधर, मथुरा में इस बात की चर्चा होती है कि देवकी फिर से गर्भवती हैं। प्रजा में खुशी की लहर दौड़ पड़ती है। लोग कहते हैं कि अब तो तारणहार आने वाला है। तब एक नागरिक कहता है कि चुप रहो, कंस का एक सैनिक आ गया है। दूसरा नागरिक कहता है तो क्या हुआ। अब हम किसी सैनिक से नहीं डरते। हमारे तारणहार आने वाले हैं। यह सुनकर सैनिक कहता है क्या कहा? महाराज कंस के सैनिकों से भी नहीं डरते? ऐसा कहकर सैनिक कोड़े मारने लगता है तो नागरिक कहता है कि हम स्वयं महाराज कंस से भी नहीं डरते। हमारे तारणहार आने वाले हैं। फिर सभी नागरिक उस सैनिक की तलवार छीन कर कहते हैं कि अब तुम इसकी चिंता करो कि तुम्हारे महाराज जीवित रहेंगे या नहीं? हमारे तारणहार देवकी के गर्भ में आ चुके हैं।
कंस को यह सूचना मिलती है कि राज्य में तारणहार के नाम पर एक सैनिक को मारा गया। कंस इससे भड़क जाता है। वह आदेश देता है कि जो तारणहार का नाम ले उसकी जिव्हा खींच लो और जो भी विष्णु की पूजा करता हुआ दिखाई दे उसका मस्तक काट दो। उनको ये पाठ अच्छे से पढ़ा देना की दुनिया में एक ही भगवान है और वो है कंस। कंस और केवल कंस।
कंस के आदेश पर राज्य में मारकाट मच जाती है। प्रजाओं पर अत्याचार बढ़ जाते हैं। चारों ओर हाहाकरा मच जाता है। प्रजा त्राहिमाम-त्राहिमाम करती हुई भगवान से प्रार्थना करती है। जय श्रीकृष्णा।

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