क्या खत्म होने जा रही है दुनिया, कहीं ये प्रलय का संकेत तो नहीं?

Earth destruction
अनिरुद्ध जोशी| Last Updated: मंगलवार, 31 मार्च 2020 (15:08 IST)
धार्मिक ग्रंथों के दावों के अनुसार हजारों वर्षों पूर्व धरती पर एक बार 'जल प्रलय' हुई थी। हिन्दू मत्स्य पुराण में 'जल प्रलय' और 'नौकाबंध' नाम से इस घटना का वर्णन मिलता है। द्रविड़ देश के राजर्षि सत्यव्रत (वैवस्वत मनु) के समक्ष भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप में प्रकट होकर कहा कि आज से सातवें दिन भूमि जल के समुद्र में डूब जाएगी। तब तक एक नौका बनवा लो। ऐसी ही कथा तौरात, इंजिल, बाइबिल और कुरआन में भी मिलती है। यहूदी, ईसाई और इस्लाम में इस घटना का जिक्र 'हजरत नूह की नौका' नाम से वर्णित है। कहते हैं कि इस जल प्रलय में सिर्फ नूह या राजा वैवस्वत मनु की नाव में सवार लोग ही बचे थे बाकि सभी डूब गए थे।

धर्म, ज्योतिष, माया सभ्यता या नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी का हवाला देकर कुछ लोगों द्वारा पिछले कई वर्षों से दुनिया के खत्म होने का दावा किया जाता रहा है। कुछ लोग इस दावे के चलते निश्चित ही दहशत में रहते हैं तो कुछ इसे अंधविश्वास मानते हैं। दुनिया के खत्म होने के मंजर को लेकर हॉलीवुड में कई फिल्में बन चुकी है। लेकिन हम यहां कहने जा रहे हैं कि अभी दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं होने जा रहा है। आओ जानते हैं कि इस संदर्भ में वेद, पुराण बाइबल, कुरआन आदि ग्रंथों में क्या लिखा है?

हिन्दू धर्म : प्रलय के संबंध में हिंदू धर्म की धारणा मूल रूप से वेद और पुराणों से प्रेरित है। प्रलय का अर्थ होता है संसार का अपने मूल कारण प्रकृति में सर्वथा लीन हो जाना। प्रलय चार प्रकार की होती है- नित्य, नैमित्तिक, द्विपार्थ और प्राकृत। प्राकृत ही महाप्रलय है, जो कल्प के अंत में होगी। एक कल्प में कई युग होते हैं। यह युग के अंत में प्राकृत प्रलय को छोड़कर कोई सी भी प्रलय होती है। हिन्दू धर्म मानता है कि जो जन्मा है वह मरेगा। सभी की उम्र निश्चित है फिर चाहे वह सूर्य हो या अन्य ग्रह।
प्रलय काल पुराणों में सृष्टि उत्पत्ति, जीव उद्भव, उत्थान और प्रलय की बातों को सर्गों में विभाजित किया गया है। जैसे वर्तमान में धरती का प्रौढ़ावस्था का काल चल रहा है, जो लगभग विक्रम संवत 2042 पूर्व शुरू हुआ माना जाता है। इस काल में अतिविलासी, क्रूर, चरित्रहीन, लोलुप, यंत्राधीन प्राणी धरती का नाश करने में लगे हैं। इससे पहले गर्भकाल, शैशवकाल, कुमार काल, किशोर काल और युवा काल बित चुका है। इसके बाद वृद्धकाल, जीर्ण काल और अंत में उपराम काल होगा। वृद्ध काल में साधन भ्रष्ट, त्रस्त, निराश, निरूजमी, दुखी जीव रहेंगे। जीर्ण काल में अन्न, जल, वायु, ताप सबका अभाव क्षीण होगा और धरती पर जीवों के विनाश की लीला होगी। उपराम काल अर्थात करोड़ों वर्षों आगे तक ऋतु अनियमित, सूर्य, चन्द्र, मेघ सभी विलुप्त हो जाएंगे। भूमि ज्वालामयी हो जाएगी। अकाल, प्रकृति प्रकोप के बाद ब्रह्मांड में आत्यंतिक प्रलय होगा।
हिंदू पुराणों अनुसार कलिकाल के अंत में भगवान विष्णु अंतिम बार वापस आएंगे, जिसको हिंदू धर्म में कल्कि कहा गया है। महाभारत में कलियुग के अंत में प्रलय होने का जिक्र है, लेकिन यह किसी जल प्रलय से नहीं बल्कि धरती पर लगातार बढ़ रही गर्मी से होगा। महाभारत उल्लेख मिलता है कि सूर्य का तेज इतना बढ़ जाएगा कि सातों समुद्र और नदियां सूख जाएंगी। संवर्तक नाम की अग्रि धरती को पाताल तक भस्म कर देगी। वर्षा पूरी तरह बंद हो जाएगी। सबकुछ जल जाएगा, इसके बाद फिर बारह वर्षों तक लगातार बारिश होगी। जिससे सारी धरती जलमग्र हो जाएगी।

ईसाई धर्म : बाइबल में दुनिया के अंत के बारे में स्पष्ट नहीं है। कुछ लोग इस पवित्र ग्रंथ में दुनिया के अंत का अर्थ बुरे लोगों का अंत, व्यवस्था का अंत से लगाते हैं। कुछ लोग मानते हैं कि तब प्रभु यीशु पुन: अवतरित होंगे। कहते हैं कि सभी मृत और जीवित लोगों को आकाश में ले जाया जाएगा, जहां वो सभी यीशु से मिलेंगे। इस मान्यता को 'रैपचर' का नाम दिया गया है।
यीशु ने कहा, “उस दिन और उस वक्‍त के बारे में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत, न बेटा, लेकिन सिर्फ पिता जानता है।” उसने यह भी बताया कि अंत अचानक होगा, उस घड़ी जब किसी ने सोचा भी न होगा।'' (मत्ती 24:36, 42 और मत्ती 24:44 बाइबल)

बाइबल में इन घटनाओं के होने के समय को 'अन्त समय,' 'आखिरी दिनों' और 'अन्तिम दिनों' कहा गया है। बाइबल अनुसार युद्ध, भुखमरी, बीमारियां और भूकंप से दुनिया में अंत होगा। तब बस कुछ लोग ही बच जाएंगे। इस दिन प्रभु न्याय करेगा। मत्ती 24:7 और लूका 21:11 में इसका उल्लेख मिलता है।
इस्लाम : इस्लाम में भी प्रलय का दिन माना जाता है, जिसे कियामत कहा गया है। कुरआन मजीद में कियामत के दिन को यौमुद्दीन (बदले का दिन) और थयौगुल फसल (फैसले का दिन) और यौमुल हिसाब (हिसाब का दिन) कहा गया है। इस्लाम के अनुसार कियामत कब आएगी इसे केवल अल्लाह तआला ही जानता है।

हालांकि इस्लाम में कियामत की कुछ निशानियां बताई गई हैं। हदीस में जिक्र है कि जब आएगी तो सूर्य पूर्व की बजाय पश्चिम से निकलेगा और आधा निकलने के बाद वह फिर पूर्व से निकलेगा। सफ्फारीनी रहिमहुल्लाह ने अपने अक़ीदा की किताब में इन निशानियों को क्रमबद्ध किया है। मज्मूउल फतावा (2/प्रश्न संख्या : 137)

बौद्ध धर्म में प्रलय : बौद्ध धर्म की तिब्बत परंपरा के मुताबिक जब दुनिया से सभी धर्म और सभी जाति के लोग खत्म हो जाएंगे तो उसके करीबन 4600 वर्षों बाद प्रलय आएगी. क्षितिज में एक-एक कर लगभग 6 और सूर्य आएंगे जिसके बाद एक आग के गोले की तरह दुनिया का विनाश होगा।
हालांकि त्रिपिटक आदि बौद्ध धर्मग्रंथों में इसका जिक्र नहीं मिलता है।


पारसी धर्म में प्रलय : पारसी धर्म के अनुसार प्रलय आने से पहले दुनिया बिल्कुल पवित्र हो जाएगी। साथ ही प्रलय आने से पहले आखिरी बार ईश्वर और शैतान का आमना सामना होगा, जिसमें ईश्वर विजयी होंगे। इसके बाद ईश्वर दुनिया का एक बार फिर से उसी तरह निर्माण करेगें जैसे दुनिया बनाई गई थी।-ज़ेंद अवेस्ता


यहूदी धर्म में प्रलय : यहूदी धर्म में माना जाता है कि मौत के बाद मरने वाले व्यक्ति की आत्मा ईश्वर के पास चली जाती है। कयामत यानी प्रलय के दिन ईश्वर सभी मृत लोगों के शरीर को नए सिरे से बनाएंगे, जिनको ईश्वर के सामने खड़े होकर अपने-अपने कर्मों की सजा दी जाएगी। यहूदी मान्यता के अनुसार भी अंत के समय मसीहा (मूसा) लौटेगा।-
तनख




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