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केंद्रपाड़ा में रथयात्रा में मुसलमान लेते हैं हिस्सा

orissa rath yatra
केंद्रपाड़ा (ओडिशा)। हिन्दू-मुस्लिम के बीच के धार्मिक अवरोधों को तोड़ते हुए रथयात्रा केंद्रपाड़ा में  सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का प्रतीक बनती जा रही है। भाईचारे की यह भावना केवल  रथयात्रा तक ही सीमित नहीं है बल्कि एक-दूसरे के अन्य धार्मिक समारोह में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं यहां के लोग।
 

 
केंद्रपाड़ा के 67 वर्षीय निवासी शौकत अली के लिए हर साल भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की  रथयात्रा में हिस्सा लेना एक रीत बन गई है, जो उनके परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही है। अली ने  कहा कि परंपरा और आपसी सम्मान के चलते वे इस वार्षिक उत्सव के उत्साही प्रतिभागी हैं।
 
उन्होंने कहा कि मैंने अपने परिवार के साथ शनिवार को पहले ईद मनाई और बाद में, मैं भव्य सड़क पर  रथयात्रा देखने गया। हम हर साल रथयात्रा देखने जाते हैं। मैंने किशोरावस्था में पहली बार रथयात्रा देखी  थी, यह हमारे परिवार के लिए एक वार्षिक उत्सव बन गया है। हिन्दू इस उत्सव में हमारी भागीदारी की  सराहना भी करते हैं। यह परंपरा हमारे यहां पीढ़ियों से चली आ रही है, अब मेरे नाती-पोते भी हर साल  रथयात्रा देखने जाते हैं।
 
अली की तरह ही उनके समुदाय के कई अन्य लोग भी धार्मिक अवरोधों को तोड़ते हुए इस रथयात्रा में  हिस्सा लेते हैं। जैसे-जैसे रथयात्रा सड़क पर आगे बढ़ती जाती है, मुसलमानों में उत्साह का संचार होता  जाता है।
 
स्थानीय निवासी मीर ओबदा ने बताया कि भाईचारे की यह भावना केवल रथयात्रा तक सीमित नहीं है।  हिन्दू भी मुसलमानों द्वारा आयोजित ईद जैसे तमाम धार्मिक समारोह में हिस्सा लेते हैं। दोनों समुदायों के  लोग एक-दूसरे के सामाजिक समाराहों व विवाह आदि में भी शिरकत करते हैं।
 
केंद्रपाड़ा नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद अकबर अली ने कहा कि केंद्रपाड़ा सांप्रदायिक सौहार्द और  आपसी भाईचारे की एक जीती-जागती मिसाल है।
 
उन्होंने बताया कि मुस्लिम समुदाय की लगभग एक-तिहाई आबादी यहां के शहरी इलाकों में बसती है।  मनमुटाव के कुछ एक मामलों को छोड़ दें तो दोनों समुदाय एक-दूसरे की धार्मिक प्रथाओं का सम्मान  करते हैं। 
 
सेवक नरुसिंघा पात्री ने बताया कि पुरी के प्रसिद्ध मंदिर में गैरहिन्दुओं का प्रवेश सख्त वर्जित है, पर  उनके रथयात्रा में शामिल होने पर कोई पाबंदी नहीं है।
 
जयपुरा के स्थानीय निवासी शबीर खान ने बताया कि मैं हमेशा रथयात्रा में हिस्सा लेता हूं। मैंने रथ को  खींचा भी है, ऐसा करने से मुझे असीम सुख महसूस होता है। (भाषा)