पति आपके प्रति कितने वफादार
सात फेरों के बंधन में कितनी पवित्रता
हर पति यह चाहता है कि उसकी पत्नी बेहद सुंदर, घरेलू व उसके प्रति वफादार हो। पत्नी तो पति के इस साँचे में धीर-धीरे ढल जाती है परंतु जब पत्नी एक वफादार पति की कामना करती है तो पति दो कदम पीछे जरूर हट जाता है। विवाह के बंधन से बँधकर पति-पत्नी एक-दूसरे के साथी बन जाते हैं और दंपति के रूप में एक नए जीवन की शुरुआत करते हैं। वफादारी की नींव पर यह रिश्ता कायम होता है लेकिन जब इसमें कोई तीसरा आ जाता है तो रिश्तों की यह डोर कमजोर पड़ जाती है। उस वक्त प्यार का यह बंधन बेडि़यों सा लगता है, जिससे मुक्त होने को दिल करता है। * पत्नी चाहिए घरेलू :- अक्सर पतियों को ऐसी पत्नी चाहिए जो ज्यादा समझदार व पढ़ी-लिखी न हो क्योंकि यदि वो ज्यादा पढ़ी-लिखी होगी तो वह पति से सवाल-जवाब करेगी और उसकी व्यक्तिगत जिंदगी में दखलअंदाजी करेगी। स्वच्छंदता से अपनी जिंदगी जीने वाले पति के लिए तो ऐसी पत्नी गले की घंटी बन सकती है। इसे कोई पति अपने गले में बाँधना पसंद नहीं करेगा। |
| कोई भी रिश्ता हो, उसमें प्यार व सम्मान होना बहुत जरूरी है। पति-पत्नी का रिश्ता भी तभी प्रगाढ़ बन सकता है जब उसमें एक-दूसरे के प्रति प्यार व सम्मान हो। आधिपत्य व अहम् का भाव आने पर रिश्तों में कड़वाहट आ जाती है। |
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* पति-पत्नी और वो :- जब पति-पत्नी के बीच कोई तीसरी औरत आकर पत्नी के अधिकारों कर अतिक्रमण करने लगती है, तब प्यार से बसे-बसाए घर-परिवार में विवादों की काली छाया पड़ने लगती है। इससे प्यार से गूँथे रिश्तों की कसावट खत्म हो जाती है और पति-पत्नी एक-दूसरे से कटने लगते हैं। * तुम अपना काम करो :- घर-गृहस्थी का कामकाज संभालने वाली पत्नी, पति को तब बुरी लगने लग जाती है जब पत्नी उससे अपने अधिकार माँगती है। पति के प्रेम-प्रसंगों पर छींटाकशी करने वाली पत्नी उसके पति को इतनी नागवार गुजरती है कि वह अपनी प्रेमिका को पाने के लिए अपने साथ सात फेरे लेने वाली पत्नी तक को त्यागने को तैयार हो जाता है। पत्नी के द्वारा अपने अधिकारों की माँग करने पर गुस्से में आग बबूला पति उसे अपनी निजीजिंदगी में दखलअंदाजी करने से साफ इंकार कर देता है। ... और दोनों पति-पत्नी साथ-साथ रहते हुए भी अजनबी से बन जाते हैं।
* जब पत्नी को हो जाए प्यार :- यदि पति को शादी के बाद भी किसी दूसरी महिला से प्यार हो जाए तो पत्नी उस कड़वे सच को जहर का घूँट समझकर पी जाती है लेकिन यदि इसके विपरीत हो तो पति का क्रोध सातवें आसमान पर पहुँच जाता है और वह अपनी पत्नी पर चरित्रहीनता का आरोप लगाता है।जब पति विवाहेतर संबंध कायम करता है तब वह 'शरीफ' कहलाता है और यदि पत्नी ऐसा करती है तो वह 'चरित्रहीन', आखिर ऐसा क्यों है? अब गए वो जमाने जब पत्नी, पति की सेवा में ही अपना पूरा जीवन निकाल देती थी।* हर कोई चाहता है सम्मान :- कोई भी रिश्ता हो, उसमें प्यार व सम्मान होना बहुत जरूरी है। पति-पत्नी का रिश्ता भी तभी प्रगाढ़ बन सकता है जब उसमें एक-दूसरे के प्रति प्यार व सम्मान हो। आधिपत्य व अहम् का भाव आने पर रिश्तों में कड़वाहट आ जाती है। शादी होने का यह मतलब नहीं कि पति-पत्नी अब एक-दूसरे के साथ चुपचाप अपनी जिंदगी गुजार लें। जिंदगी का आनंद तभी आएगा, जब वे दोनों एक-दूसरे को समझेंगे। रिश्तों की डोर बड़ी नाज़ुक होती है। व्यर्थ के तनाव व आरोप-प्रत्यारोप से यह टूट सकती है। इस पर प्यार का आवरण चढ़ाएँ व एक सुखी जीवन की शुरुआत करें।
लेखक के बारे में
गायत्री शर्मा