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दोस्त वही जो मन को पढ़े

दोस्त
- लीला जैन

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दूसरे सभी रिश्तों से बढ़कर और संवेदनशील रिश्ता है दोस्ती का। यूँ तो दोस्त वही होता है जिसे आप उसकी कमियों के साथ स्वीकारें पर कई बार विश्वास और प्यार से बने इस रिश्ते में कड़वाहट भी आ जाती है। अगर आपका दोस्त है इनमें से एक, तो जानिए कैसे उसके साथ बनाएँ बेहतर तालमेल :-

राय थोपने वाले :-
इस तरह के दोस्तों को बात-बात पर राय सुनाने की जैसे आदत-सी होती है, चाहे जरूरत हो या नहीं। आपको महसूस होने लगता है कि आपका मित्र आपकी सभी चीजों पर अपना फैसला थोपता रहता है। वह आपसे अपनी बात मनवाने में ही आपकी भलाई समझता है। उसे लगता है कि आप में फैसला लेने की क्षमता नहीं है।

क्या करें :-
मनोचिकित्सकों के अनुसार 'ऐसे दोस्तों के साथ आपका अच्छा सामंजस्य बना रहे इसके लिए जब भी वह अपना फैसला सुनाए उसके सामने यह जाहिर करें कि आप उसके फैसले का आदर करते हैं पर हर व्यक्ति अपनी गलती से ही सीखता है। इससे उसे एहसास होगा कि आप निर्णय लेना जानते हैं। उससे कहें कि यदि आपको राय की जरूरत होगी, तो आप अवश्य उसकी मदद लेंगे।'

डिपेंड रहने वाले :-
ऐसे लोग अपनी हर छोटी से छोटी जरूरत को पूरा करने के लिए वक्त-बेवक्त अपने दोस्तों को परेशान करने से नहीं चूकते। आपका दोस्त आधी रात में आपको फोन करके अपनी परेशानी बताता है।

क्या करें :-
मनोवैज्ञानिक कहते हैं- अपने ऐसे दोस्त को आप उतना ही समय दें जितना आप दे सकते हैं। उसे स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनाना सिखाएँ। अगर जरूरत पड़े तो उसे समझाएँ कि उसका आप पर निर्भर रहना दोस्ती में दरार आने की वजह बन सकता है। पर इस बात का ध्यान रखें कि उससे यह सब तब न कहें जब वह परेशानी में हो, बल्कि तब कहें जब वह शांत हो जाए।

नकारात्मक विचार बोले : -
इस तरह का मित्र बहुत ही 'टिपिकल' होता है। उसे हमेशा आपसे कोई न कोई शिकायत रहती है, क्योंकि वह आपके सकारात्मक पहलू पर कम और नकारात्मक पहलू पर ज्यादा ध्यान देता है। यही कारण है कि वह सिर्फ अपनी परेशानियाँ और शिकायतें ही आपको गिनाता रहता है।

क्या करें :-
ऐसे में आप उसकी शिकायत को नजरअंदाज करें और कहें कि ऐसा तो होता रहता है। जब भी मौका मिले बात करते समय विषय ही बदल दें। यदि इसके बावजूद उसे समझ में न आए तो आप उसे साफ-साफ कह दें। उसे यह बताने का प्रयास करें कि वह सकारात्मक पहलुओं पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करे।

होड़ करने वाले : -
कुछ मित्र होड़ करने वाले होते हैं। आपके दोस्त की आदत है जो चीज आपके पास है वह उसके पास भी होनी चाहिए। वह भी आपकी चीज से कीमती और अच्छी।

क्या करें : -
अगर आप अपने मित्र के ऐसा करने से ईर्ष्या करते हैं, तो इसका मतलब है कि आप उससे खुश नहीं हैं। उसे यह ऐहसास दिलाएँ कि उसकी इस आदत से कई बार आप परेशान हो जाते हैं। वह सिर्फ अपने बारे में ही न सोचे आपकी भावनाओं का भी ध्यान रखें।
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WD