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Written By गायत्री शर्मा

'तलाक' बन गया है आम

ताकि तलाक की नौबत ही न आए

तलाक
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विवाह से आपके एक नए जीवन की शुरुआत होती है। एक ऐसा जीवन जिसमें आपके सफर का एक नया साथी आपसे जुड़ जाता है। उस साथी को आपके प्यार व सहयोग की जरूरत होती है।

जब तक दंपत्तियों में प्यार, सामंजस्य व विश्वास बना रहता है, तब तक सात फेरों से बँधे इस रिश्ते की गाड़ी जीवन की पटरी पर तेजी से दौड़ती है लेकिन जब दंपत्तियों के बीच शक, अविश्वास व असहमति के रोड़े आ जाते हैं तो उनके जीवन की गाड़ी में ब्रेक लग जाता है।

कल तक कभी कभार सुनने में आने वाला 'तलाक' शब्द अब एक आम शब्द बन गया है। अपनी मर्जी से शादी करके कुछ समय बाद आपसी सहमति से उससे अलग हो जाना अब युवाओं का नया ट्रेंड बन गया है, जिससे कि विवाह और इससे उपजे संबंध मौज-मस्ती का एक जरिया बन रहे हैं।

  कहने को तो आज हम बहुत अधिक बुद्धिमान हो गए हैं परंतु हकीकत में रिश्तों की पहचान व उनको निभाने के मामले में अब तक हमारी सोच पूर्णत: परिपक्व नहीं हुई है। आज भी हम नासमझी में प्यार, शादी और तलाक जैसे जीवन के महत्वपूर्ण फैसले ले लेते हैं।      
कई बार हमारे सुनने में यह आता है कि शादी के साल भर बाद ही दंपत्तियों में तलाक हो गया। 'तलाक' यह शब्द अब हमारे कानों में पहले की तरह नहीं खटकता है। प्यार किसी से और शादी किसी से, यह आजकल के युवाओं का नया शौक बन गया है और शादी महज औपचारिकता।

उनके लिए शादी के बंधन में बँधना अपने परिवार की खुशी के लिए किया गया सर्मपण होता है। अब आप ही बताएँ कि क्या सात फेरों से बँधा विवाह का यह बंधन आज इतना कच्चा हो गया है कि महज 'तलाक' कह देने मात्र से यह टूट जाएगा?

शादी कोई मजाक या गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं है, जिसमें प्यार व भावनाओं जैसी कोई चीज नहीं होती है। यह हकीकत में दो दिलों व दो परिवारों का मिलन है, जिसमें खेल, मस्ती या मजाक जैसी कोई चीज नहीं।

कहने को तो आज हम बहुत अधिक बुद्धिमान हो गए हैं परंतु हकीकत में रिश्तों की पहचान व उनको निभाने के मामले में अब तक हमारी सोच पूर्णत: परिपक्व नहीं हुई है। आज भी हम नासमझी में प्यार, शादी और तलाक जैसे जीवन के महत्वपूर्ण फैसले ले लेते हैं और बाद में अपने इन फैसलों पर पछतावा करते हैं।

तलाक के माध्यम से अपने साथी को जीवन की बीच मझधार में छोड़ना कौन सी अक्लमंदी है? अब हमें रिश्तों को पहचानना व उनमें जीना सीखना होगा। तभी हम रिश्तों को निभा पाएँगे व अपने परिवार के संस्कारों को अपनी आने वाली पीढ़ी को दे पाएँगे।
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गायत्री शर्मा