मां भगवती के दर्शन और बर्फ का नजारा
श्रीनगर। अगर आप एक पंथ दो काज अर्थात बर्फीली चोटियों की सैर और मां भगवती के दर्शनों की इच्छा रखते हैं तो वैष्णो देवी के दरबार में चले आइए। बर्फ की सफेद चादर से ढंकी त्रिकुटा पर्वत की चोटियां ही नहीं सांझी छत पर जमी बर्फ के ढेर भी पुकार रहे हैं।
करीब दो सालों के बाद त्रिकुटा पर्वत और उसके आसपास के इलाकों में ऐसा नजारा देखने को मिला है। बर्फबारी का आनंद उठाने वाले करीब 7 हजार श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। बर्फ ने कई स्थानों पर फिसलन पैदा कर दी थी। भौरों घाटी में बर्फ ने श्राइन बोर्ड प्रशासन को मजबूर कर दिया था कि वह रास्ते को बंद कर दें क्योंकि भूस्खलन और चट्टानें गिरने का खतरा बढ़ गया था।
इस बर्फबारी के बाद हालात चाहे कुछ भी हों, मन में बर्फ के नजारे देखने और मां भगवती के दर्शन करने की इच्छा लेकर आने वालों की कमी नहीं है। हालांकि यात्रा मार्ग पर फिसलन के बावजूद श्राइन बोर्ड ने लोगों से वैष्णो देवी की यात्रा में शामिल होने से रोका नहीं है क्योंकि वह जानता है कि अकेले कटरा कस्बे में 30 से 40 हजार लोगों को सिर छुपाने की जगह देने की कूवत है।
नतीजतन त्रिकुटा पर्वत पर स्थित माता वैष्णो देवी के दरबार में हाजिरी लगाकर बर्फ का आनंद उठाने वालों के तांते को देखते हुए श्राइन बोर्ड में भी जब जब भक्ति जागी तो उसने माता की पुरानी गुफा को खोल कर इसका प्रदर्शन किया था। याद रहे कि माता की यात्रा की कथा के मुताबिक, इसी गुफा से होकर मां की पिंडियों के किए गए दर्शन फल देते हैं।
यही कारण है कि वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के लिए बोर्ड प्रशासन सर्दियों में अक्सर प्राचीन गुफा के द्वार खोलकर श्रद्धालुओं को आकर्षित करता रहा है। वह ऐसा इसलिए भी अब अधिकतर बार करने लगा है क्योंकि पिछले साल यात्रा में 10 लाख की गिरावट आने से वह भी परेशान हो उठा है।