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Last Updated :जैसलमेर , सोमवार, 25 मई 2026 (14:31 IST)

राजस्थान के जैसलमेर में शर्मनाक लापरवाही, खुले में मिले 500 से ज्यादा गायों के कंकाल, सवालों के घेरे में प्रशासन

Cow deaths in Jaisalmer
Cow deaths in Jaisalmer: राजस्थान के जैसलमेर जिले से पशु संरक्षण और गौ सेवा के दावों को तार-तार करने वाली एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। जिले के एक सुनसान इलाके में 500 से अधिक गायों के कंकाल और सड़ी-गली लाशें मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। इस वीभत्स घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि गौशालाओं के संचालन की व्यवस्था पर भी बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय निवासियों और पशु प्रेमियों में भारी आक्रोश है।

लंबे समय से मिल रही थीं शिकायतें, नहीं जागा प्रशासन

स्थानीय लोगों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं है। इलाके में लंबे समय से गायों की बदतर स्थिति और उनकी भूख-प्यास को लेकर प्रशासन को शिकायतें भेजी जा रही थीं। इसके बावजूद, जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कोई उचित कदम नहीं उठाया। वर्तमान में स्थिति यह है कि कई एकड़ क्षेत्र में गायों के शव खुले में बिखरे पड़े हैं। भीषण गर्मी के कारण ये शव सड़ चुके हैं, जिससे पूरे इलाके में भयंकर बदबू फैल रही है और महामारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

इतनी बड़ी संख्या में गोवंश की मौत के बाद जागे प्रशासनिक अमले ने आनन-फानन में मामले की जांच के आदेश दिए हैं। पशुपालन विभाग और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें मौके पर मुआयना करने पहुंची हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक स्तर पर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि चारे और पानी की भारी कमी, अत्यधिक गर्मी, देखरेख में घोर लापरवाही या फिर किसी संक्रामक बीमारी के कारण इन गायों की मौत हुई है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि मौत के सही कारणों और सटीक आंकड़ों का खुलासा विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में उबाल

इस घटना के बाद राजस्थान में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया पर लोग सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि कागजों और भाषणों में गौ संरक्षण के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, बजट भी पास होता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गौशालाएं तबेले और डंपिंग ग्राउंड बन चुकी हैं। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक हत्या का मामला है।

अब डैमेज कंट्रोल में जुटा प्रशासन

मामला तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन अब बैकफुट पर है और डैमेज कंट्रोल में जुट गया है। फिलहाल, जेसीबी मशीनों की मदद से इलाके की सफाई और मृत पशुओं के सम्मानजनक निस्तारण (दफनाने) का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही, जिले की अन्य गौशालाओं और पशु केंद्रों की भी औचक जांच के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की अमानवीय घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
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