Vasant panchami: हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी मनाई जाती है। इस दिन माता सरस्वती की पूजा होती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह 23 जनवरी 2026 शुक्रवार को रहेगी। जानिए इस दिन कब रहेगा पूजा का शुभ मुहर्त और क्या है पूजन की विधि।
1. बसंत पंचमी पर माता सरस्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त
दिनांक: 23 जनवरी 2026, शुक्रवार
तिथि: माघ शुक्ल पक्ष पंचमी
पंचमी तिथि: 23 को 02:28 एएम से 24 को 01:46 एएम तक।
पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह: 7:30 से 11:33 तक और दोपहर: 12:34 से 12:54 तक।
अबूझ मुहूर्त: बसंत पंचमी को स्वयं सिद्ध 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है। अर्थात पूरे दिन ही शुभ मुहूर्त रहेगा।
2. बसंत पंचमी पर सरस्वती माता की पूजा विधि
तैयारी और सामग्री
रंग: पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है। संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करें।
सामग्री: माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र, पीले फूल (गेंदा या सरसों), पीला चंदन, केसर, अक्षत (चावल), धूप-दीप, और पीली मिठाई (बूंदी के लड्डू या केसरिया हलवा)।
शिक्षा का प्रतीक: अपनी पुस्तकें, पेन या वाद्य यंत्र (जैसे गिटार, हारमोनियम) पूजा स्थान पर जरूर रखें।
पूजन विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)
शुद्धिकरण: सबसे पहले गंगाजल छिड़क कर स्वयं को और पूजा स्थान को पवित्र करें।
स्थापना: एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर माँ सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करें। साथ में गणेश जी की मूर्ति भी रखें (क्योंकि हर पूजा में गणेश जी प्रथम पूज्य हैं)।
आह्वान: हाथ जोड़कर माँ का ध्यान करें और उन्हें आसन ग्रहण करने की प्रार्थना करें।
तिलक और अर्पण: माँ को पीले चंदन का तिलक लगाएं। पीले वस्त्र या चुनरी अर्पित करें और पीले फूलों की माला चढ़ाएं।
कलम और पुस्तक पूजन: अपनी कलम और किताबों पर भी तिलक लगाएं और उन्हें माँ के चरणों में रखकर प्रार्थना करें कि वे आपके भीतर अज्ञान मिटाकर सद्बुद्धि भरें।
भोग: माँ को केसरिया भात, बूंदी के लड्डू या कोई भी सफेद/पीली मिठाई का भोग लगाएं।
मंत्र और वंदना: पूजा के दौरान आप इस सरल और प्रभावशाली मंत्र का जाप कर सकते हैं:
"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वत्यै नमः"
या फिर प्रसिद्ध सरस्वती वंदना की ये पंक्तियाँ पढ़ें:
"या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता, या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना..."
आरती और क्षमा प्रार्थना: अंत में कपूर या घी के दीपक से माँ सरस्वती की आरती करें। आरती के बाद अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा प्रार्थना करें और प्रसाद बांटें।