1. धर्म-संसार
  2. व्रत-त्योहार
  3. तीज त्योहार
  4. adhikmas-purnima-vrat-shubh-sanyog-muhurat-lakshmi-narayan-puja-upay
Last Modified: शनिवार, 30 मई 2026 (12:03 IST)

अधिकमास पूर्णिमा व्रत: शुभ संयोग और मुहूर्त में करें लक्ष्मी नारायण की पूजा, जानिए उपाय

lord vishnu adhik maas purnima vrat 2026
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, जब कोई महीना दो बार आता है, तो पहले महीने को अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। यह संयोग हर तीन साल में एक बार बनता है, लेकिन इस बार सूर्य और चंद्रमा एक दूसरे के एकदम सामने होने के कारण शुभ योग बन रहा है। इस दुर्लभ संयोग में लक्ष्मी नारायण की पूजा करके आप जीवनभर के संताप से मुक्त होगी सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। चलिए जानते हैं तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और महत्वपूर्ण उपाय।

1. अधिकमास पूर्णिमा तिथि समय: 

पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ: 30 मई 2026, शनिवार को सुबह 11:57 बजे से।
पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 31 मई 2026, रविवार को दोपहर 02:14 बजे तक।
 

2. अधिकमास किस तिथि में क्या करें:

पंचांग के अनुसार, इस बार पूर्णिमा तिथि 2 दिनों में बंट रही है, जिसके कारण व्रत और स्नान-दान की तारीखें अलग-अलग हैं।
पूर्णिमा व्रत की तिथि: 30 मई 2026 (शनिवार)- इस दिन चंद्रोदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए व्रत रखना और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देना इस दिन श्रेष्ठ है।
स्नान-दान की पूर्णिमा: 31 मई 2026 (रविवार)- उदयातिथि (सूर्य उदय के समय की तिथि) मिलने के कारण पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य करना रविवार को सबसे शुभ रहेगा।
 

3. अधिकमास पूर्णिमा का महत्व:

सर्व सिद्धिदायिनी पूर्णिमा: स्कन्दपुराण, पद्मपुराण, नारदपुराण तथा भविष्यपुराण आदि धर्म ग्रन्थों में अधिकमास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) हैं। इसलिए इस पूर्णिमा को 'सर्व सिद्धिदायिनी पूर्णिमा' भी कहा जाता है।
100 यज्ञों का फल: अधिकमास की पूर्णिमा तिथि पर दान, जप, व्रत एवं कथा श्रवण करने से 100 यज्ञों के समान फल प्राप्त होता है। इस शुभ अवसर पर यथाशक्ति गंगा, यमुना, नर्मदा आदि पवित्र नदियों के पावन तट पर तीर्थ स्नान तथा दान-पुण्य आदि अवश्य करना चाहिए।
पाप नष्ट: शास्त्रों के अनुसार, अधिकमास की पूर्णिमा पर किए गए व्रत, दान और जप का फल कभी नष्ट नहीं होता। यह जीवन के सभी पापों और कष्टों का नाश करता है।
लक्ष्मी-नारायण की कृपा: इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की संयुक्त पूजा करने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती और दरिद्रता दूर होती है।
कुंडली के दोषों से मुक्ति: इस दिन चंद्रमा पूर्ण सोलह कलाओं से युक्त होता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक तनाव दूर होता है और कुंडली में 'चंद्र दोष' समाप्त होता है।
 

4. अधिकमास पूर्णिमा का विशेष संयोग:

रवि योग व बुधादित्य योग: इस दौरान रवि योग और बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है, जो पूजा-पाठ के फल को और बढ़ा देता है।
चंद्रमा और सूर्य 180 डिग्री पर: इस बार वर्षों के बाद सूर्य और चंद्रमा आपने सामने रहेंगे।
 

5. अधिकमास पूजा का शुभ मुहूर्त:

30 मई का मुहूर्त: 
अभिजीत मुहूर्त: दिन में 11:51 से 12:46 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम को 07:12 से 07:33 तक।
31 मई का मुहूर्त:
ब्रह्म मुहूर्त: प्रात: 04:03 से 04:43 तक।
अभिजीत मुहूर्त: दिन में 11:51 से 12:47 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम को 07:13 से 07:33 तक।
 

6. अधिकमास ज्येष्ठ पूर्णिमा पूजन विधि (Step-by-Step)

सुबह का स्नान: पवित्र नदी (गंगा, यमुना आदि) में स्नान करें। यदि घर पर स्नान कर रहे हैं, तो नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लें।
संकल्प लें: सूर्य देव को जल अर्पित करने के बाद, हाथ में जल और अक्षत लेकर अधिकमास पूर्णिमा व्रत का संकल्प लें।
विष्णु-लक्ष्मी पूजा: पूजा घर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं। भगवान को पीले फूल, पीला चंदन, धूप और अक्षत अर्पित करें।
सत्यनारायण कथा और भोग: इस दिन घर में भगवान सत्यनारायण की कथा करना या सुनना परम फलदायी होता है। भगवान को चरणामृत और तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) मिला हुआ पंजीरी का भोग लगाएं।
मंत्र जाप: पूजा के दौरान "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" या "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः" मंत्र का जाप करें।
चंद्र देव को अर्घ्य: शाम को जब चंद्रमा उदय हो (लगभग शाम 07:36 बजे), तब कच्चे दूध, गंगाजल और चीनी मिले जल से चंद्रमा को अर्घ्य दें।
दान का महत्व: अगले दिन सुबह किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को पीले वस्त्र, अन्न (जैसे चना दाल या चावल), फल या सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा का दान अवश्य करें। मालपुए का दान करना अधिकमास में बेहद शुभ माना जाता है।
 

7. अधिकमास ज्येष्ठ पूर्णिमा के 5 उपाय:

लक्ष्मी-नारायण का केसर के दूध से अभिषेक
अधिकमास के स्वामी भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) हैं और पूर्णिमा तिथि माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है।
क्या करें: इस दिन दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का अभिषेक करें।
लाभ: इससे घर की आर्थिक तंगी दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है।
 
पीपल के वृक्ष की पूजा और दीपदान
शास्त्रों के अनुसार पीपल के पेड़ में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास होता है। पूर्णिमा के दिन पीपल पर मां लक्ष्मी का आगमन भी माना जाता है।
क्या करें: सुबह के समय पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें और मीठा (बताशा या चीनी) चढ़ाएं। शाम के समय पीपल के जड़ के पास घी का दीपक (दीया) जलाएं और परिक्रमा करें।
लाभ: इससे पितृदोष से मुक्ति मिलती है और अटके हुए काम पूरे होते हैं।
 
चंद्र देव को अर्घ्य देना
पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ होता है। मानसिक शांति और कुंडली में चंद्र ग्रह को मजबूत करने के लिए यह उपाय बहुत कारगर है।
क्या करें: रात के समय एक तांबे या चांदी के पात्र में जल, थोड़ा सा कच्चा दूध, चावल (अक्षत) और सफेद फूल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय "ॐ सों सोमाय नमः" मंत्र का जाप करें।
लाभ: इससे मानसिक तनाव दूर होता है और घर में शांति का माहौल बनता है।
 
ज्येष्ठ मास के अनुसार 'जल और घड़े' का दान
चूंकि यह ज्येष्ठ का महीना है, इसलिए इस महीने में गर्मी अपने चरम पर होती है। इस समय जल का दान सबसे बड़ा पुण्य माना गया है।
क्या करें: पूर्णिमा के दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को पानी से भरा मिट्टी का घड़ा (मटका), खरबूजा, आम, पंखा या सत्तू दान करें।
लाभ: अधिकमास में किया गया यह दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है और जीवन के सारे कष्टों को हर लेता है।
 
मुख्य द्वार पर हल्दी और गंगाजल का छिड़काव
माता लक्ष्मी के स्वागत के लिए पूर्णिमा के दिन घर की सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
क्या करें: सुबह स्नान के बाद घर के मुख्य द्वार को साफ करें। फिर गंगाजल में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर मुख्य द्वार पर छिड़काव करें और हल्दी या सिंदूर से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं।
लाभ: इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती और मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।
विशेष टिप: इस दिन भूलकर भी घर में कलह न करें, किसी का अपमान न करें और पूरी तरह सात्विक (बिना लहसुन-प्याज का) भोजन ग्रहण करें।
लेखक के बारे में
वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
पौराणिक कथा, इतिहास, धर्म और दर्शन के जानकार, अनुभवी ज्योतिष, लेखक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें