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Written By WD

छोटे कद की बड़ी खिलाड़ी

लंदन ओलिम्पिक
जापान में जूडो को खेल से बढ़कर सम्मान हासिल है और रयोको तमुरा को देश की श्रेष्ठ जूडो खिलाड़ियों में शुमार किया जाता है। उन्होंने करियर में दो ओलिम्पिक स्वर्ण और दो रजत पदक जीते। साथ ही सात (1993, 95, 97, 99, 01, 02, 03) विश्व चैंपियनशिप स्वर्ण व एक कांस्य (1991) भी अपने नाम किया।

तमुरा ने 1992 के बार्सिलोना ओलिम्पिक के अतिरिक्त लाइट वेट में करेन ब्रिग्स को सेमीफाइनल में शिकस्त देकर तारीफ बटोरी। तब तमुरा की उम्र मात्र 16 वर्ष थी।

ालांकि फाइनल में उन्हें विश्व चैंपियन फ्रांस की केसिले नोवाक से हार का सामना करना पड़ा। लेकिन विश्व को उनमें भविष्य के चैंपियन की झलक दिख गई। हुआ भी ऐसा ही और तमुरा अगले चार वर्षों तक अपराजेय रहीं। सिर्फ 1.46 मी. (करीब 4.79 फुट) लंबी इस जूडोका की प्रसिद्धि के कारण इस खेल में महिलाओं का जुड़ाव बढ़ा।

वे 1996 ओलिम्पिक खेलों के फाइनल में पहुंची तो लगातार 84 मैच जीत चुकी थीं। इस बार उनके सामने थी नार्थ कोरिया की अनजान खिलाड़ी केयी सुन ही, जो तमुरा के बारे में ज्यादा नहीं जानती थी। केयी ने दो बार की विश्व चैंपियन तमुरा को लय में नहीं आने दिया और तमुरा यह मैच हार गईं।

इसके बाद वर्ष 2000 के ओलिम्पिक खेलों तक फिर तमुरा ने कोई मैच नहीं गँवाया। सिडनी ओलिम्पिक के दौरान जापानी प्रशंसकों की उम्मीदों का सबसे ज्यादा दबाव तमुरा पर था। इस बार उन्होंने किसी को निराश नहीं किया और 48 किग्रा के बेहद नाटकीय मैच में सोने का तमगा जीता।

उनकी शादी जापानी बेसबॉल टीम के खिलाड़ी योशीतोमो तानी से हुई। इसलिए 2004 के ओलिम्पिक में उन्होंने रयोको तानी के नाम से हिस्सा लिया। इसके बाद 2004 के एथेंस खेलों में भी उन्होंने अपना खिताब बरकरार रखा। अपना ओलिम्पिक खिताब बचाने वाली वे पहली जूडोका बनी।

6 सितंबर 1975 को जन्मी रयोको को उनके प्रदर्शन के कारण 'यावारा-चान' के नाम से भी पुकारा जाता है। वास्तव में यह नाम वहां के एक प्रसिद्ध जूडो कॉमिक्स के मुख्य पात्र का नाम है। हालाँकि उनकी प्रसिद्धि इतनी बढ़ी कि अब रयोको पर आधारित वीडियो गेम्स जापान में बहुत प्रसिद्ध हैं।
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