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Last Modified: नई दिल्ली , शनिवार, 30 अगस्त 2025 (00:40 IST)

भारतीय अर्थव्यवस्था किस दर से बढ़ेगी, मुख्‍य आर्थिक सलाहकार ने दिया यह जवाब

Statement of Chief Economic Advisor V. Anantha Nageswaran regarding the Indian economy
Indian Economy News : मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने उच्च अमेरिकी शुल्क की वजह से जोखिम पैदा होने के बीच शुक्रवार को भरोसा जताया कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.3 से 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है लेकिन अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाए जाने से वृद्धि अनुमान पर थोड़ी प्रतिकूलता आ सकती है। उन्होंने कहा कि शुल्क से जुड़े प्रभाव वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही तक सीमित रह सकते हैं।
 
नागेश्वरन वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जून तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने के आंकड़े सामने के बाद बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा, अमेरिका की तरफ से लगाए गए उच्च आयात शुल्क 'अस्थाई' ही साबित होंगे क्योंकि दोनों देश जुर्माने के तौर पर लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क को हटाने और उसके बाद द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, रूसी कच्चे तेल के संबंध में लगे अतिरिक्त शुल्क को लेकर थोड़ी अनिश्चितता है, लेकिन सामान्य तौर पर बातचीत चल रही है और उम्मीद है कि हम निकट भविष्य में किसी प्रकार का समाधान देखेंगे। नागेश्वरन ने कहा, हमारा मानना ​​है कि चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि लक्ष्य, खासकर पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन को देखते हुए, 6.3-6.8 प्रतिशत के दायरे में बना रहेगा।
 
अप्रैल-जून तिमाही में देश की जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है जो रिजर्व बैंक के 6.5 प्रतिशत अनुमान से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि देश के जीडीपी वृद्धि अनुमान में बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है। उन्होंने कहा कि शुल्क से जुड़े प्रभाव वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही तक सीमित रह सकते हैं। हालांकि अमेरिकी शुल्क अधिक समय तक लागू रहने की स्थिति में कुछ नकारात्मक जोखिम देखने को मिल सकते हैं।
निजी क्षेत्र के कई अनुमानों में कहा गया है कि उच्च अमेरिकी शुल्क की वजह से भारत की आर्थिक वृद्धि दर में 0.2 प्रतिशत से लेकर एक प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। जनवरी में संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक वृद्धि दर 6.3 से 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने उम्मीद जताई कि आगामी तिमाहियों में समग्र मांग बनी रहेगी क्योंकि जीएसटी दर में कटौती किए जाने की संभावना है और त्योहारी मौसम खपत को प्रोत्साहित करेगा। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के कर स्लैब को चार से घटाकर दो स्लैब पर लाने पर जीएसटी परिषद की सितंबर की शुरुआत में होने वाली बैठक में फैसला होने की संभावना है। इसमें सिर्फ पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत के दो स्लैब ही रखने का प्रस्ताव है। (इनपुट एजेंसी)
Edited By : Chetan Gour
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