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Last Updated : मंगलवार, 19 अगस्त 2025 (12:46 IST)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, नेहरू युग के पाप धो रही है सरकार

Prime Minister Narendra Modi on Indus Water Treaty
Prime Minister Narendra Modi on Indus Water Treaty: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिंधु जल समझौते को लेकर एक बार फिर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर नेहरू पर हमला बोला है। उन्होंने नेहरू की संसद या अपने मंत्रिमंडल को विश्वास में लिए बिना पाकिस्तान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए आलोचना की। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने कहा कि नेहरू ने देश के हित की परवाह किए बिना अपनी छवि चमकाने के लिए ऐसा किया था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को 80 प्रतिशत से अधिक जल का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है।
 
क्या कहा था पंडित नेहरू ने : पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद मोदी सरकार ने इस संधि को स्थगित कर दिया है। सूत्रों ने बताया कि एनडीए की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार उस दौर के पापों को धो रही है। मोदी ने कहा कि बाद में नेहरू ने अपने एक सहयोगी से कहा कि उन्हें विश्वास था कि यह समझौता पाकिस्तान के साथ अन्य मुद्दों को सुलझाने में मदद करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ALSO READ: सिंधु जल संधि पर फिर गिड़गिड़ाया पाकिस्तान, भारत से की अपील
 
मोदी ने ‘एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स’ द्वारा भारत की दीर्घकालिक सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग बढ़ाने के हालिया निर्णय का भी उल्लेख किया और कहा कि यह देश की सुदृढ़ अर्थव्यवस्था को दर्शाता है तथा इससे अधिक निवेश आकर्षित होगा।  ALSO READ: न तो सद्भावना है और न ही मि‍त्रता, फिर सिंधु जल संधि कैसी
 
क्या है सिंधु जल समझौता : सिंधु जल समझौता, जिसे सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) भी कहते हैं, भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी के बंटवारे के लिए हुआ एक महत्वपूर्ण समझौता है। यह समझौता 19 सितंबर 1960 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच हुआ था। इस संधि में विश्व बैंक ने मध्यस्थता की थी।
 
इस संधि के तहत, सिंधु नदी प्रणाली में आने वाली छह नदियों को दो श्रेणियों में बांटा गया था। पूर्वी नदियां- रावी, 
ब्यास और सतलुज के पानी के उपयोग का अधिकार भारत को दिया गया है। पश्चिमी नदियां- सिंधु, झेलम और 
चिनाब का पानी पाकिस्तान को दिया गया है। हालांकि, भारत को इन नदियों पर भी कुछ सीमित इस्तेमाल की अनुमति है, जैसे- पनबिजली परियोजनाएं बनाना, घरेलू और कृषि उपयोग आदि। इस संधि का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि दोनों देशों के बीच नदियों के पानी को लेकर कोई विवाद न हो। (एजेंसी/वेबदुनिया)
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
 
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