पीएम मोदी ने उडुपी में बताया, किस प्रकार श्री कृष्ण की नीतियों पर चल रही है सरकार
PM Modi on Udupi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को उडुपी के श्री कृष्ण मठ में बताया कि किस प्रकार उनकी सरकार श्री कृष्ण की नीतियों पर चल रही है। मेरा जन्म गुजरात में हुआ और गुजरात एवं उडुपी के बीच गहरा और विशेष संबंध रहा है। मान्यता है कि यहां स्थापित भगवान श्री कृष्ण के विग्रह की पूजा पहले द्वारका में माता रुक्मिणी करती थी। बाद में जगद्गुरु श्री माधवाचार्य जी ने इस प्रतिमा को यहां पर स्थापित किया।
राष्ट्र की सुरक्षा नीति का मूल भाव यही है कि हम वसुधैव कुटुम्बकम भी कहते हैं और हम धर्मो रक्षति रक्षितः का मंत्र भी दोहराते हैं। हम लाल किले से श्री कृष्ण की करुणा का संदेश भी देते हैं और उसी प्राचीर से मिशन सुदर्शन चक्र की उद्घोषणा भी करते हैं।
उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण हमें सबके कल्याण की बात सिखाते हैं और यही बात वैक्सीन मैत्री, सोलर अलायंस और वसुधैव कुटुम्बकम की हमारी नीतियों का आधार बनती हैं। श्री कृष्ण ने गीता का संदेश युद्ध की भूमि पर दिया था और भगवदगीता हमें सिखाती है कि शांति और सत्य की स्थापना के लिए अत्याचारियों का अंत भी आवश्यक है।
पीएम मोदी ने कहा कि आज 'सबका साथ-सबका विकास, सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय' जैसी हमारी नीतियों के पीछे भी भगवान श्री कृष्ण के इन्हीं श्लोकों की प्रेरणा है। भगवान श्री कृष्ण हमें गरीबों की सहायता का मंत्र देते हैं। और इसी मंत्र की प्रेरणा आयुष्मान भारत और पीएम आवास जैसी योजना का आधार बन जाती है।LIVE: PM Shri @narendramodi participates in Laksha Kantha Gita Parayana programme at Sri Krishna Matha in Udupi. https://t.co/6fhNTci8sx
— BJP (@BJP4India) November 28, 2025
उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण हमें नारी सुरक्षा, नारी सशक्तिकरण का ज्ञान सिखाते हैं। और उसी ज्ञान की प्रेरणा से देश नारीशक्ति वंदन अधिनियम का ऐतिहासिक निर्णय करता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि रामचरित मानस में लिखा है- कलियुग केवल हरि गुन गाहा, गावत नर पावहिं भव थाहा। अर्थात कलियुग में केवल भगवद् नाम और लीला का कीर्तन ही परम साधन है। उसके गायन कीर्तन से भवसागर से मुक्ति हो जाती है।
उन्होंने कहा कि हमारे समाज में मंत्रों का और गीता के श्लोकों का पाठ तो शताब्दियों से हो रहा है, पर जब 1 लाख कंठ, एक स्वर में इन श्लोकों का ऐसा उच्चारण करते हैं, जब इतने सारे लोग गीता जैसे पुण्य ग्रन्थ का पाठ करते हैं, जब ऐसे दैवीय शब्द एक स्थान पर एक साथ गूंजते हैं, तो एक ऐसी ऊर्जा निकलती है, जो हमारे मन को, हमारे मष्तिष्क को एक नया स्पंदन और नई शक्ति देती है।
edited by : Nrapendra Gupta

