सफाई नहीं, इस्तीफा : क्या यौन अपराधी एपस्टीन से संबंध रखने वाले केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पीएम मोदी के लिए बनेंगे मुसीबत?
Hardeep Singh Puri News: अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी जेफरी एपस्टीन के दस्तावेजों ने भारतीय राजनीति में एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। एक सजायाफ्ता यौन अपराधी और नाबालिगों की तस्करी में शामिल व्यक्ति के साथ भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के संबंधों के खुलासे ने नैतिकता और सार्वजनिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि पुरी ने स्वीकार किया है कि उन्होंने एपस्टीन से तीन-चार बार मुलाकात की और ईमेल के जरिए संपर्क में रहे, लेकिन क्या यह केवल एक 'राजनयिक शिष्टाचार' था या कुछ और? विशेषज्ञों और विपक्ष का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की छवि और सरकार की नैतिकता को बचाने के लिए पुरी को पद छोड़ देना चाहिए।
यहां 4 प्रमुख कारण दिए गए हैं कि आखिर यह मामला इतना गंभीर क्यों है:
1. सजा के बावजूद अपराधी से संपर्क बनाए रखना
दस्तावेजों के अनुसार, हरदीप सिंह पुरी ने 2008 में एपस्टीन की दोषसिद्धि (Conviction) के बाद भी 2014 तक उनसे संपर्क बनाए रखा। पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में माना कि मुलाकातें हुईं, लेकिन उन्होंने इसे गलत नहीं माना।
सवाल: एक सार्वजनिक पद पर बैठा व्यक्ति उस अपराधी से संपर्क क्यों रख रहा था, जिस पर नाबालिगों के शोषण के गंभीर आरोप सिद्ध हो चुके थे? यह महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के प्रति सरकार की जीरो-टोलरेंस नीति पर सवाल उठाता है।
2. व्यक्तिगत लाभ और व्यावसायिक नेटवर्किंग
लीक हुए ईमेल से पता चलता है कि पुरी ने एपस्टीन को "भारत में अपना आदमी" बताया था। वे एपस्टीन के नेटवर्क का उपयोग कर लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन जैसे लोगों को भारत लाने और व्यावसायिक अवसर तलाशने की कोशिश कर रहे थे। "एक सेवानिवृत्त राजनयिक और वर्तमान मंत्री द्वारा एक अपराधी के प्रभाव का उपयोग करना सार्वजनिक नैतिकता का खुला उल्लंघन है।"
3. संदिग्ध अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क (IPI कनेक्शन)
पुरी ने इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) में काम किया था, जिसके प्रमुख टेरजे रोड-लार्सन थे। लार्सन पर एपस्टीन से लाखों डॉलर लेने और उनके कुख्यात द्वीप पर जाने के आरोप हैं। पुरी का ऐसे सर्कल से जुड़ाव, जो पहले से ही अंतरराष्ट्रीय जांच के दायरे में है, भारत की वैश्विक छवि के लिए जोखिम पैदा करता है।
4. नैतिक जवाबदेही और बढ़ता राजनीतिक दबाव
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित विपक्ष ने संसद में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। यहाँ तक कि पुरी के मित्र माने जाने वाले विश्लेषक डॉ. आनंद रंगनाथन ने भी टीवी बहस में निराशा व्यक्त की है। उनका तर्क है कि 2008-09 में सजायाफ्ता होने के बाद भी मुलाकातें जारी रखना अक्षम्य है।
नैतिकता : क्या 'बेटी बचाओ' का नारा देने वाली सरकार ऐसे मंत्री को कैबिनेट में बनाए रख सकती है?
शुचिता की परीक्षा : यह मामला अब केवल स्पष्टीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक शुचिता का विषय बन चुका है। प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह स्थिति असहज हो सकती है। ऐसे में हरदीप सिंह पुरी को सफाई देने के बजाय इस्तीफा देकर जांच का सामना करना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों की गरिमा बनी रहे।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala