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Last Updated : शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026 (13:54 IST)

क्‍या भाजपा के नोटिस से जा सकती है राहुल गांधी की सदस्यता, क्‍या है पूरा मामला?

Can Rahul Gandhi membership be cancelled due to BJP notice
सत्‍ता और विपक्ष के नेता लोकसभा में तकरीबन रोजाना ही आमने-सामने हो रहे हैं। पहले माना जा रहा था कि भाजपा राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव ला सकती है। हालांकि बाद में साफ हुआ कि भाजपा राहुल के खिलाफ सब्स्टेंटिव मोशन (Substantive Motion) लेकर आई है।

बता दें कि बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के एक बयान को लेकर उनके खिलाफ सब्स्टेंटिव मोशन दायर किया है। उन्होंने राहुल की संसद सदस्यता रद्द करने और चुनाव लड़ने पर आजीवन बैन लगाने की मांग की है। अगर लोकसभा अध्यक्ष इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, तो सदन में इस पर बहस होगी, वोटिंग हो सकती है और प्रस्ताव पारित होने पर इसके आधार पर आगे की प्रक्रिया चल सकती है।

क्या है सब्स्टेंटिव मोशन : संसदीय प्रक्रिया में सब्स्टेंटिव मोशन वह स्वतंत्र मूल प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य सदन की स्पष्ट राय या निर्णय प्राप्त करना होता है।

क्‍या है इसकी खास बातें?
इसे अलग से पेश किया जाता है, किसी अन्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होता।
इस पर सीधी बहस और मतदान होता है।
पारित होने पर यह सदन की आधिकारिक इच्छा या स्टैंड को दर्शाता है।
यह सामान्य चर्चा, शून्यकाल या अल्पकालिक प्रस्ताव से बिल्कुल अलग होता है।
क्यों लाया जाता है?
किसी उच्च पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई।
किसी सांसद के आचरण पर निर्णय।
अविश्वास प्रस्ताव या अनुशंसित कार्रवाई।
किसी विशेष मुद्दे पर सदन का औपचारिक मत।
इसलिए इसका राजनीतिक असर व्यापक और गंभीर माना जाता है।

राहुल गांधी के संदर्भ में क्‍या हो सकता है : बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के एक बयान को लेकर उनके खिलाफ सब्स्टेंटिव मोशन दायर किया है। उन्होंने राहुल की संसद सदस्यता रद्द करने और चुनाव लड़ने पर आजीवन बैन लगाने की मांग की है। अगर लोकसभा अध्यक्ष इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, तो सदन में इस पर बहस होगी, वोटिंग हो सकती है और प्रस्ताव पारित होने पर इसके आधार पर आगे की प्रक्रिया चल सकती है। यही कारण है कि इसे राहुल गांधी की संसद सदस्यता से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्या सब्स्टेंटिव मोशन से सांसद की सदस्यता जा सकती है?
केवल प्रस्ताव पास होने से स्वतः सदस्यता खत्म नहीं होती। सदस्यता समाप्त करने के स्पष्ट प्रावधान संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में ही मौजूद हैं-

अपराध में दोषसिद्धि, अयोग्यता की घोषणा, दल-बदल कानून, संसद की विशेष प्रक्रिया (ब्रिच ऑफ प्रिविलेज आदि) सब्स्टेंटिव मोशन केवल सिफारिश या आगे की कार्रवाई का रास्ता खोल सकता है। इस पर अंतिम फैसला स्पीकर, चुनाव आयोग, या न्यायपालिका पर निर्भर करता है।

राहुल गांधी के मामले में आशंका क्यों बढ़ी : इससे पहले भी मानहानि केस में दोषसिद्धि के कारण उनकी सदस्यता रद्द हुई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी थी। मौजूदा विवाद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में तनाव है। विपक्ष को आशंका है कि अगर कोई कठोर प्रस्ताव आगे बढ़ा तो इसका गंभीर असर हो सकता है। हालांकि संसदीय विशेषज्ञों का मानना है कि सदस्यता खत्म करने के लिए केवल राजनीतिक विवाद या बयानबाजी पर्याप्त आधार नहीं होते। इसके लिए ठोस कानूनी एवं संवैधानिक आधार जरूरी है।

सब्स्टेंटिव मोशन एक सशक्त संसदीय हथियार की तरह है, जो किसी मुद्दे पर सदन की औपचारिक राय तय करता है। राहुल गांधी के मामले में यह सीधे सदस्यता समाप्ति का आधार नहीं है, लेकिन संसदीय प्रक्रिया और राजनीति- दोनों में इसकी अहम भूमिका हो सकती है।
Edited By: Naveen R Rangiyal
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