उन्होंने कहा कि अरावली पर्वतमाला भारत के चार राज्यों दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में फैली हुई है। अरावली का क्षेत्र 39 जिलों में विस्तारित है। अरावली को लेकर कानूनी प्रक्रिया कोई नई नहीं है, बल्कि 1985 से इस पर याचिकाएं चल रही हैं। इन याचिकाओं का मूल उद्देश्य अरावली क्षेत्र में खनन पर सख्त और स्पष्ट नियम लागू करना रहा है, जिसका सरकार पूरी तरह समर्थन करती है।भ्रम फैलाना बंद करें!
— Bhupender Yadav (@byadavbjp) December 21, 2025
अरावली के कुल 1.44 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में मात्र 0.19% हिस्से में ही खनन की पात्रता हो सकती है।
बाकी पूरी अरावली संरक्षित और सुरक्षित है।#AravalliIsSafe pic.twitter.com/ojbaqtlniG
क्या बोले अखिलेश : सपा नेता अखिलेश ने अपनी पोस्ट में कहा कि अरावली को बचाना कोई विकल्प नहीं है बल्कि ये तो संकल्प होना चाहिए। मत भूलिए कि अरावली बचेगी तो ही एनसीआर बचेगा। अरावली को बचाना अपरिहार्य है क्योंकि यह दिल्ली और एनसीआर के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच है या कहें कुदरती ढाल है। अरावली ही दिल्ली के ओझल हो चुके तारों को फिर से दिखा सकती है, पर्यावरण को बचा सकती है। अरावली पर्वतमाला ही दिल्ली के वायु प्रदूषण को कम करती है और बारिश-पानी में अहम भूमिका निभाती है।प्रिय दिल्लीवासियों,
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) December 21, 2025
बची रहे जो अरावली
तो दिल्ली रहे हरीभरी!
अरावली को बचाना कोई विकल्प नहीं है बल्कि ये तो संकल्प होना चाहिए। मत भूलिए कि अरावली बचेगी तो ही एनसीआर बचेगा।
अरावली को बचाना अपरिहार्य है क्योंकि यह दिल्ली और एनसीआर के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच है या कहें… pic.twitter.com/YqZgIwtM9h