दो कौड़ी वाले बयान पर घिरीं अंजना ओम कश्यप, यूट्यूबर टीचर्स ने खोला एंकर के खिलाफ मोर्चा, सोशल मीडिया में बवाल
एक टीवी चैनल की एंकर अंजना ओम कश्यप द्वारा यूट्यूब (YouTube) के शिक्षकों पर "दो कौड़ी के" और फ्रॉड जैसी अपमानजनक टिप्पणी करने के बाद सोशल मीडिया पर भारी विवाद छिड़ गया है। इस बयान को लेकर देशभर के ऑनलाइन शिक्षकों और छात्रों में भारी गुस्सा है, और कई जाने-माने शिक्षकों ने उन्हें करारा जवाब दिया है।
विवाद की शुरुआत : पेपर लीक और परीक्षा विवादों पर चल रही डिबेट के दौरान अंजना ओम कश्यप ने यूट्यूब पर पढ़ाने वाले शिक्षकों (YouTuber Teachers) पर तंज कसा था। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से कई लोगों को ज्ञान नहीं होता, वे सिर्फ व्यूज बटोरने के लिए ड्रामा करते हैं और छात्रों की कमाई लूटते हैं।
खान सर का पलटवार : पटना के मशहूर शिक्षक खान सर का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने अंजना के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि शिक्षक कभीतलवे नहीं चाटते' बल्कि छात्रों को सही शिक्षा देते हैं।
यूट्यूबर्स का एकजुट विरोध : अभिनय मैथ्स'(Abhinay Sharma) और अन्य कई ऑनलाइन एजुकेटर्स ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से पलटवार किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ऑनलाइन शिक्षक योग्य नहीं हैं तो लाखों छात्र मुफ्त या कम फीस में पढ़कर सरकारी नौकरियां और प्रतियोगी परीक्षाएं कैसे पास कर रहे हैं।
अंजना का स्पष्टीकरण : विवाद बढ़ने के बाद एंकर ने एक बयान जारी कर कहा कि उनके पुराने वीडियो पोस्ट करके उन्हें ट्रोल किया जा रहा है, लेकिन वह 'कोचिंग माफिया' के खिलाफ अपनी आवाज उठाना जारी रखेंगी।
ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब पर छिड़ी बहस : सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अब इस मुद्दे को लेकर एक व्यापक बहस छिड़ गई है। ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब जैसे माध्यमों पर हजारों की संख्या में छात्र और शिक्षक एकजुट होकर इस बयान के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं। कई प्रमुख एजुकेटर्स ने वीडियो जारी कर यह तर्क दिया है कि जिस प्रकार से मुख्यधारा की मीडिया में कई बार एजेंडा आधारित पत्रकारिता होती है, उसे देखकर यह टिप्पणी करना कि यूट्यूब शिक्षक केवल विवशता या अन्य कारणों से पढ़ा रहे हैं, न केवल गलत है बल्कि तथ्यात्मक रूप से भी कमजोर है। आज यूट्यूब पर ऐसे अनेक शिक्षक हैं जो विषय की गहरी समझ रखते हैं और जिन्होंने शिक्षा प्रणाली में एक समानांतर और प्रभावी विकल्प खड़ा किया है।
बिहार से उठे विरोध के स्वर : बिहार से उठने वाले इन विरोध के स्वरों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब शिक्षक समुदाय अपनी गरिमा के प्रति बेहद जागरूक है। लोग इस बयान को एक ऐसे वर्ग के प्रति पूर्वाग्रह के रूप में देख रहे हैं जो शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला रहा है। जानकारों का मानना है कि मीडिया को अपनी जिम्मेदारी का अहसास होना चाहिए कि वह सार्वजनिक मंचों पर किन शब्दों का चयन कर रही है। शिक्षकों के प्रति असम्मानजनक व्यवहार न केवल उस व्यक्ति का अपमान है, बल्कि उस पेशे का भी अपमान है जिसे सभ्य समाज में गुरु का स्थान प्राप्त है।
Edited By: Naveen R Rangiyal
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