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Written By WD Feature Desk
Last Modified: शनिवार, 2 अगस्त 2025 (13:59 IST)

क्या होता है टैरिफ?, ट्रंप के फैसले से भारत पर क्या पड़ सकता है असर?

tariff kya hota hai
what is tariff, america tariff effect on india: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की दुनिया में 'टैरिफ' एक ऐसा शब्द है जो आज कल सुर्ख़ियों में है। खासकर जब डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता वैश्विक व्यापार नीतियों को प्रभावित करते हैं, तो टैरिफ का मुद्दा और भी गरमा जाता है। लेकिन आखिर ये टैरिफ क्या होते हैं, और अमेरिका जैसे बड़े देश द्वारा लगाए गए टैरिफ का भारत जैसे उभरते हुए अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? आइए, इस पर गहराई से विचार करें।

टैरिफ क्या है?
सरल शब्दों में, टैरिफ एक प्रकार का सीमा शुल्क या आयात शुल्क है जो किसी देश द्वारा विदेश से आने वाले सामानों पर लगाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य दोहरे होते हैं:
1. स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा: टैरिफ लगाने से आयातित सामान घरेलू बाजार में महंगा हो जाता है। इससे उपभोक्ताओं के लिए देश में बने उत्पाद अधिक आकर्षक और प्रतिस्पर्धी हो जाते हैं, जिससे घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिलता है।
2. सरकारी आय में वृद्धि: टैरिफ सरकार के लिए राजस्व का एक स्रोत भी होता है। यह शुल्क सीधा सरकारी खजाने में जाता है।
टैरिफ व्यापार संरक्षणवाद का एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जिसका उपयोग अक्सर घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए किया जाता है।

ट्रंप के टैरिफ फैसलों का भारत पर संभावित असर
डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति अपनाई, जिसके तहत कई देशों पर टैरिफ लगाए गए, जिनमें चीन प्रमुख था। हालांकि, इन नीतियों का अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष प्रभाव भारत पर भी पड़ सकता है। आइए, कुछ प्रमुख प्रभावों पर गौर करें:
1. निर्यात को नुकसान: यदि अमेरिका भारत से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर टैरिफ लगाता है, तो वे उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो जाएगी और उनके लिए अमेरिका को सामान बेचना मुश्किल हो जाएगा।

2.   रुपये पर संकट (दबाव): निर्यात में कमी से भारत का व्यापार घाटा बढ़ सकता है (यानी आयात अधिक और निर्यात कम)। जब निर्यात कम होता है, तो डॉलर का प्रवाह भारत में कम हो जाता है, जिससे रुपये पर दबाव पड़ सकता है और यह डॉलर के मुकाबले कमजोर हो सकता है। कमजोर रुपया आयात को महंगा बनाता है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है।

3. आम लोगों पर प्रभाव: यदि भारत भी जवाबी टैरिफ लगाता है (जैसा कि अक्सर व्यापार युद्ध में होता है), तो आयातित सामान महंगे हो जाएंगे। उदाहरण के लिए, यदि कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों या चिकित्सा उपकरणों पर टैरिफ लगता है जो भारत आयात करता है, तो वे आम उपभोक्ताओं के लिए महंगे हो जाएंगे। कुल मिलाकर, यह आम आदमी की जेब पर सीधा बोझ डाल सकता है।

4. आईटी सेवाओं पर प्रभाव: अमेरिका भारत की आईटी सेवाओं का एक बड़ा ग्राहक है। यद्यपि सेवाओं पर सीधे टैरिफ नहीं लगते, व्यापार युद्ध का समग्र आर्थिक माहौल आईटी सेक्टर को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकता है। यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था धीमी पड़ती है या वहां व्यापार अनिश्चितता बढ़ती है, तो आईटी कंपनियों के लिए नए कॉन्ट्रैक्ट्स मिलना मुश्किल हो सकता है। कुछ मामलों में, अमेरिकी सरकार भारतीय कंपनियों के लिए वीज़ा नियमों को कड़ा कर सकती है, जिससे भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए वहां काम करना मुश्किल हो सकता है।

5. शेयर मार्केट पर असर: टैरिफ से जुड़ी खबरें और व्यापार युद्ध की आशंकाएं अक्सर वैश्विक शेयर बाजारों में अनिश्चितता पैदा करती हैं। भारतीय शेयर बाजार भी वैश्विक रुझानों से अछूता नहीं है। यदि भारतीय कंपनियों के निर्यात प्रभावित होते हैं या आर्थिक विकास की गति धीमी पड़ती है, तो निवेशकों का विश्वास डगमगा सकता है, जिससे शेयर बाजार में गिरावट आ सकती है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों की कंपनियों के शेयरों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है जो निर्यात-उन्मुख हैं।

 
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