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कालसर्प दोष के अशुभ प्रभाव से बचें, करें नाग पंचमी पर यह उपाय। nag panchami upay

Nag Panchmi 2019
नाग पंचमी  के दिन प्रात:काल स्नान करने के उपरांत शुद्ध होकर यथाशक्ति (स्वर्ण, रजत, ताम्र) 2 नागों की प्रतिष्ठा कर उनका धूप, दीप, नैवेद्य आदि से पंचोपचार अथवा षोडषोपचार पूजन करना चाहिए। तत्पश्चात 'सर्पसूक्त' से प्रतिष्ठित नागों का दुग्धाभिषेक करना चाहिए। अभिषेक के पश्चात हाथ जोड़कर निम्न प्रार्थना करनी चाहिए।
 
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शंखपालं धार्तराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।
 
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात: काले विशेषत:।
तस्मै विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्।।
 
उक्त प्रार्थना करने के बाद पूर्ण श्रद्धाभाव से प्रणाम कर एक नाग को किसी भी शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए तथा दूसरे नाग को दूध से भरे दोने (पात्र) में रखकर किसी पवित्र नदी या बहते जल में निम्न विसर्जन प्रार्थना से प्रवाहित करना चाहिए।
 
विसर्जन प्रार्थना-
 
सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथिवीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था येन्तरे दिवि संस्थिता:।।
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:।
ये च वापीतड़ागेषु तेषु सर्वेषु वै नम'।।
 
जिन जातकों की जन्म पत्रिका में 'कालसर्प' दोष हो, उन जातकों को 'नाग पंचमी' वाले दिन उक्त पूजा अवश्य करनी चाहिए। नाग पंचमी वाले दिन 'कालसर्प' दोष निवारण पूजा करने से विशेष लाभ होता है।
 
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: [email protected]
 
लेखक के बारे में
पं. हेमन्त रिछारिया
ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया ज्योतिष प्रभाकर उपाधि से सम्मानित हैं। विगत 12 वर्षों से ज्योतिष संबंधी अनुसंधान एवं ज्योतिष से जुड़ी गलत धारणाओं का खंडन कर वास्तविक ज्योतिष के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहे हैं। कई ज्योतिष आधारित पुस्तकों का लेखन।.... और पढ़ें
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