क्‍यों अमरीश पुरी ख़ौफ से भरी अपनी आवाज किसी को रिकॉर्ड नहीं करने देते थे?

(जन्‍म: 22 जून 1932- निधन: 12 जनवरी 2005)
कोई अपने काम के लिए कितना जुनूनी हो सकता है। अमरीश पुरी जितना? शायद नहीं। अमरीश पुरी का नियम था कि वे वीडियो या ऑडियो इंटरव्यू नहीं देते थे। जो फुटेज नजर आते हैं, वो शूटिंग के दौरान की होती है। अखबारों या मैगजीन को इंटरव्यू देते वक्त भी वो अपनी आवाज रिकॉर्ड नहीं करने देते थे।

वे कहते थे कि लोग उनकी आवाज को ज्यादा से ज्यादा फिल्मों में ही सुनें। इंटरव्यू लेने वाले से वो साफ कह देते थे कि प्लीज, अपना रिकॉर्डर बंद कर लीजिए। जब मैगजीन से उन्हें इंटरव्यू के लिए फोन आता था, तो वो कहते थे कि अगर कवर स्टोरी में जगह मिलेगी तभी इंटरव्यू दूंगा।

सिगरेट-शराब या तंबाखू नहीं। उस पर देशी कसरत और दूध-घी की खुराक। कोई मुंबई में और वो भी बॉलीवुड इंडस्ट्री में रहकर जीने का यह तरीका अपना ले वो अमरीश पुरी ही हो सकते हैं। शायद जीवन का यही तरीका अमरीश पुरी ने अभिनय में भी लागू किया, इसी वजह से उनके पर्दे पर आने पर वो ख़ौफ नजर आया जो दूसरे किसी विलेन के कारण नहीं आ सकता। अगर यूं कहे कि अमरीश पुरी ख़ौफ का पर्याय थे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

कई फिल्मों में अमरीश पुरी का साथ दे चुके रज़ा मुराद ने एक बार अपने इंटरव्यू में कहा था---
जैसे दुनिया में एक अमिताभ बच्चन है, वैसे ही एक अमरीश पुरी भी है।

अमरीश पुरी अपने आप में एक अलग ही इंसान थे। जीने का ठेठ देसी तरीका और कुछ वैसा ही टशन भी। ऐसा नहीं है कि ये टशन उनके स्टार बनने के बाद आया। अपनी फिल्मी पारी की शुरुआत से ही वे ऐसे थे।
एक बार हॉलीवुड निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग ने जब उनसे अपनी फिल्म में काम देने के लिए अमेरिका आकर स्क्रीन टेस्ट देने को कहा तो उन्होंने स्टीवन को साफ इनकार कर दिया था। कहा…तुम्हारे स्क्रीन टेस्ट के लिए मैं अमेरिका नहीं आ सकता

आखिरकार स्पीलबर्ग को हिंदुस्तान आना पड़ा। जैसा कि अनुमान था कि वे अमरीश पुरी को शायद ही साइन करे। लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी स्पीलबर्ग ने उन्हें अपनी फिल्म में साइन किया। ‘इंडियाना जोन्स एंड द टेंपल ऑफ डूम’ में अमरीश पुरी पहली बार गंजे हुए और फिर यह उनका स्टाइल ही बन गया। अमरीश पुरी की टशन का सिर्फ एक यही किस्सा नहीं है।

जब वे फिल्मों में हीरो बनने के ख्वाब के साथ मुंबई आए तो पहले स्क्रीन टेस्ट में ही फेल हो गए। उन्होंने अपने भाई मदनपुरी से मदद मांगी। मदन पुरी ने कहा…यहां अपने दम और काबिलियत पर ही जगह बनाना होगी, कोई तुम्हारी मदद नहीं करने वाला

फिर क्या था अमरीश पुरी ने अपना जुनून छोड़ा नहीं। पहले राज्य कर्मचारी बीमा निगम में नौकरी शुरू की। सरकारी दफ्तर में करीब 18 साल गुजारे। इसके साथ ही वे गिरीश कर्नाड और सत्यदेव दुबे से जुड़े रहे। नाटकों में खुद को निखारते रहे।

30 साल की उम्र में अमरीश पुरी ने देव आनंद की फिल्म प्रेम पुजारी से अपना डेब्यू किया था। यह फिल्म 1970 में आई थी। अमरीश पुरी को एक छोटी सी भूमिका मिली। हालांकि रोल इतना छोटा था कि पता ही नहीं चलता कब वे आए और चले गए। इसके बाद उन्हें ‘रेशमा और शेरा’, ‘निशांत’ और ‘मंथन’ मिली। जो उनके करियर को धकाती रही। 1980 में ‘आक्रोश’ आई और 1982 में ‘विधाता’ इसके बाद तो अमरीश पुरी डॉन्ग, जगावर चौधरी, मोगैंबो, भुजंग, बलवंत राय और ठकराल जैसे किरदारों से ख़ौफ का एक पर्याय बन गए।

ऐसा नहीं है अमरीश पुरी जैसा फिल्मों में दिखते थे वैसे निजी जिंदगी में भी थे। हालांकि फिल्म के बदले अपनी पूरी फीस की डिमांड से उन्होंने कोई समझौता नहीं किया। लेकिन वे निजी तौर पर बहुत मुलायम भी थे। फिल्म डायरेक्टर श्याम बेनेगल ने एक इंटरव्यू में कहा था,

एक बार हमारे एक दोस्त और उसकी फैमिली का एक्सीडेंट हो गया। पत्नी सरवाइव कर गई, लेकिन दोस्त और उसका बेटा क्रिटिकल थे। हॉस्पिटल में उनके लिए रेयर ब्लड ग्रुप की जरूरत पड़ी, जो कि अमरीश का ग्रुप भी था। हमारे उस दोस्त से उनका कोई परिचय नहीं था। बावजूद इसके वो अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर्स से बोले, ‘मैं ब्लड देना चाहता हूं, जितनी जरूरत हो ले लीजिए।दुर्भाग्य से दोस्त और उसका बेटा बचा नहीं। लेकिन बिना किसी के कहे अमरीश का ब्लड देना मुझे आज भी याद है।

सख़्त चेहरे और उससे भी ज्यादा सशक्त अभिनय को निभाने वाले अमरीश पुरी जैसे कलाकार की मौत मस्तिष्क की नस फट जाने के कारण हुई थी। 22 जून 1932 में लाहौर में जन्में अमरीश पुरी का 12 जनवरी 2005 में निधन हो गया था।

अमरीश पुरी के दस पॉपुलर डायलॉग
1. मोगैंबो खुश हुआ- मिस्टर इंडिया
2. जा सिमरन जा, जी ले अपनी जिंदगी- दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे
3. पैसों के मामले में मैं पैदाइशी कमीना हूं, दोस्ती और दुश्मनी का क्या, अपनों का खून भी पानी की तरह बहा देता हूं- करण अर्जुन
4. आओ कभी हवेली पर- नगीना
5. जिंदगी में भी वीसीआर की तरह रिवाइंड बटन होता तो, कितना अच्छा होता- नायक
6. इतने टुकड़े करूंगा कि तू पहचान नहीं सकेगा- गदर
7. जवानी में अक्सर ब्रेक फ़ेल हो जाया करते हैं !- फूल और कांटे
8. जब भी मैं किसी गोरी हसीना को देखता हूं, मेरे दिल में सैकड़ों काले कुत्ते दौड़ने लगते हैं- शहंशाह
9. अजगर किसे कब और कहां निगल जाता है ये तो मरने वाले को भी पता नही चलता
10. जो जिंदगी मुझसे टकराती है वो सिसक-सिसस कर दम तोड़ती है’- घायल



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