एक थी अमीना। वह हर रोज़ आधी रात तक अपने शौहर अहमद का इंतज़ार किया करती थी। अहमद यारों की महफ़िल से लौटता, घर पहुंच कर सो जाता और फिर निकल जाता। न जाने कितने साल यह सिलसिला चलता रहा। अमीना ने कभी नहीं पूछा कि वह कहां जाता है...