Makar Sankranti celebration in India: मकर संक्रांति पर पतंग उत्सव का आयोजन भारत में खासतौर पर गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बड़े धूमधाम से किया जाता है। यह उत्सव पतंग उड़ाने और सूर्य की उत्तरायण की दिशा में प्रवेश का प्रतीक होता है। मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का पर्व है। मकर संक्रांति न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि यह ऋतु परिवर्तन, नई फसल, स्वास्थ्य, सकारात्मक ऊर्जा और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। यह दिन विशेष रूप से पुण्य कार्यों, दान और स्नान के लिए शुभ माना जाता है।
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यहां मकर संक्रांति पर पतंग उत्सव से जुड़ी 10 रोचक बातें प्रस्तुत हैं:
1. प्रभु श्री राम की परंपरा: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्री राम ने मकर संक्रांति के दिन ही अपने भाइयों और हनुमान जी के साथ पतंग उड़ाई थी। तब से इसे एक धार्मिक परंपरा के रूप में मनाया जाता है।
2. सूर्य की किरणों का लाभ: वैज्ञानिक दृष्टि से, सर्दियों में शरीर में 'कफ' की मात्रा बढ़ जाती है और त्वचा रूखी हो जाती है। संक्रांति पर धूप में पतंग उड़ाने से शरीर को विटामिन D मिलता है, जो हड्डियों और इम्युनिटी के लिए रामबाण है।
3. स्वतंत्रता का संदेश: आकाश में ऊंची उड़ती पतंग 'मोक्ष' और 'स्वतंत्रता' का प्रतीक मानी जाती है। यह संदेश देती है कि जिस तरह पतंग ऊंचाइयों को छूती है, वैसे ही मनुष्य को भी अपने जीवन में प्रगति करनी चाहिए।
4. अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव: गुजरात का अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव/ International Kite Festival इतना प्रसिद्ध है कि 2012 में इसमें 42 देशों की भागीदारी के कारण इसे 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज करने का प्रयास किया गया था। बता दें कि हर साल जनवरी में उत्तरायण के अवसर पर गुजरात में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव आयोजित किया जाता है।
5. रात की पतंगबाजी (तुकल): गुजरात में रात के समय पतंगों के साथ जलते हुए लालटेन या दीये बांधकर उड़ाए जाते हैं, जिन्हें 'तुकल' कहा जाता है। रात का आकाश इनसे तारों की तरह जगमगा उठता है।
6. खुशहाली का प्रतीक: मकर संक्रांति को खुशहाली, समृद्धि और नए अवसरों का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को तिल और गुड़ से बने पकवानों का आदान-प्रदान करते हैं, जो जीवन में मिठास और सुख-शांति का प्रतीक माने जाते हैं।
8. विभिन्न देशों की भागीदारी: सूर्य उत्तरायण हिंदू कैलेंडर का एक विशेष पर्व है, जब यहां पतंग उत्सव का आयोजन होता है। आज यह उत्सव सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है। गुजरात के पतंग महोत्सव में फ्रांस, तुर्की, थाईलैंड और यूक्रेन जैसे 50 से अधिक देशों के पतंगबाज हिस्सा लेते हैं। इस बार 50 देशों से 135 विदेशी पतंगबाजों की हजारों रंग-बिरंगी पतंगें आसमान में उड़ेंगी।
9. उड़ान का प्रतीक: पतंग उड़ाना मकर संक्रांति पर शुभ माना जाता है। इसे जीवन के संघर्षों से ऊपर उठने और नकारात्मकता को दूर करने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। यह एक तरह से उत्सव मनाने का तरीका भी है।
10. खास पकवानों का साथ: पतंग उत्सव का आनंद तब और बढ़ जाता है जब इसके साथ तिल-गुड़ के लड्डू, तिल की पुरणपोली, तिल की रेवड़ी, उंधियू और जलेबी जैसे व्यंजनों का स्वाद जुड़ता है। तिल और गुड़ का दान भी इस दिन महत्व रखता है।
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाना केवल एक खेल नहीं है, बल्कि यह परंपराओं, विज्ञान और खुशियों का एक सुंदर मिश्रण है।
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