सोनिया के निशाने पर आडवाणी
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी के मजबूत नेता के दावे की हवा निकालने के प्रयास के तहत कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने रविवार को आंतरिक सुरक्षा से निबटने के उनके तौर-तरीके पर सवाल उठाया और जिन्ना विवाद के बाद दबाव में पार्टी प्रमुख के पद से उनके इस्तीफे का उपहास उड़ाया।संघ और भाजपा के संबंधों का सीधे तौर पर जिक्र किए बिना उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस कभी किसी दूसरे संगठन के रिमोट से संचालित नहीं रही है।सोनिया ने तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि संसद, जम्मू के रघुनाथ मंदिर और गुजरात के अक्षरधाम में हमले उस समय हुए, जब मजबूत नेता उपप्रधानमंत्री थे और गृह मंत्रालय भी संभाल रहे थे।मोहम्मद अली जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष करार देने संबंधी आडवाणी की टिप्पणी का उल्लेख और संघ का परोक्ष हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जब मजबूत नेता ने एक दुर्भाग्यपूर्ण बयान दिया, उन्हें दूसरे संगठन के दबाव में इससे पल्ला झाड़ना पड़ा, जिसने उन्हें उनकी पार्टी के शीर्ष पद से त्यागपत्र देने पर मजबूर किया गया।उन्होंने कहा कि मजबूत नेता की सरकार ने कंधार प्रकरण के दौरान आतंकवादियों को रिहा किया और उन्हें अफगानिस्तान लेकर गए। उन्होंने कहा कि दूसरी तरफ जब मुंबई में हमला हुआ हमने न सिर्फ एक दोषी को पकड़ा बल्कि पाकिस्तान को स्वीकार करने पर मजबूर किया कि हमलावर उनकी जमीन से आए।सोनिया ने प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को ईमानदार, मेहनती और कर्मठ बताते हुए कहा कि वे अपने को मजबूत नेता और प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
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