इनके अल्गोरिदम से मिली ब्लैक होल की तस्वीर

Last Updated: शनिवार, 13 अप्रैल 2019 (11:36 IST)
कल कल तक उन्हें कोई नहीं जानता था, एक दिन के अंदर वे स्टार हो गई हैं। अमेरिका की कंप्यूटर साइंटिस्ट को ये रातोंरात ख्याति उस के लिए मिली है जिसकी वजह से की पहली तस्वीर ले पाना संभव हुआ।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एस्ट्रोफीजिक्स सेंटर में पोस्ट डॉक्टरल रिसर्च कर रही 29 वर्षीया बाउमैन ने ब्लैक होल की तस्वीर जारी होने के बाद अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा, "मैं इतनी उत्साहित हूं कि आखिरकार हम वह शेयर कर पा रहे हैं जिस पर हम पिछले साल काम कर रहे थे।" ब्लैक होल के उस हिस्से को कहते हैं जहां मैटर इतना संकुचित है कि वह एक ऐसा गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र निर्मित करता है जिससे होकर रोशनी भी नहीं गुजर सकती।

बुधवार को वैज्ञानिकों द्वारा रिलीज की गई तस्वीर में दिख रहा ब्लैक होल 5.5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर एम 87 नाम के गैलेक्सी के केंद्र में है। हालांकि ब्लैक होल के अस्तित्व का सालों से पता था, लेकिन उसे देखना अब तक संभव नहीं था। 2016 में बाउमैन ने चिर्प (CHIRP) नाम का एक अल्गोरिदम विकसित किया जिसकी मदद से विश्व भर इवेंट होराइजन टेलिस्कोप प्रोजेक्ट के तहत जमा विशाल डाटा के आकलन के जरिए तस्वीर बनाना संभव था।


चिर्फ ने सही मायनों में डाटा के पहाड़ से निबटने में मदद दी। कई पेटाबाइट (कई मिलियन बिलियन बाइट) डाटा सैकड़ों पाउंड भारी कंप्यूटरों के हार्ड ड्राइव पर जमा था। उन्हें ट्रांसपोर्ट कर मैसाच्युसेट इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित हाइस्टैक ऑब्जर्वेटरी ले जाना पड़ा। तस्वीर के सटीक होने की गारंटी करने के लिए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के हार्वर्ड स्मिथसोनियन एस्ट्रोफीजिक्स सेंटर ने ये डाटा चार टीमों को दिया। इन टीमों ने एक दूसरे से अलग उस डाटा से अल्गोरिदम की मदद तस्वीर बनाने की कोशिश की।

एक महीने के काम के बाद हर टीम ने अपने नतीजे दूसरी टीमों को उपलब्ध कराए। बाउमैन ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया, "वह मेरी जिंदगी का अब तक का सबसे खुशनुमा पल था। मैंने देखा कि सभी टीमों की तस्वीरें बहुत एक जैसी थीं जिसमें निचला हिस्सा ऊपरी हिस्से के मुकाबले ज्यादा चमक वाला था। ये देखना अद्भुत था कि हर किसी को ये तस्वीर मिली।"


इस साल कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एसिस्टेंट फ्रोफेसर की नौकरी शुरू करने जा रही बाउमैन ने कहा, "एक अल्गोरिदम या इंसान ने ये तस्वीर नहीं बनाई।" उन्होंने कहा कि इसके लिए दुनिया भर से आने वाले वैज्ञानिकों की टीम की अद्भुत प्रतिभा और सालों की कड़ी मेहनत की जरूरत थी। बाउमैन ने अपने साथियों का शुक्रिया अदा करते हुए लिखा है, "ये सचमुच सम्मान की बात थी, मैं इतनी खुशकिस्मत हूं कि आपके सब के साथ काम करने के मौका मिला।"
एमजे/ओएसजे (एएफपी)

 

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