लाल किताब क्या कहती है संतान योग या सुख के बारे में, जानिए

sun lal kitab
अनिरुद्ध जोशी| पुनः संशोधित सोमवार, 30 दिसंबर 2019 (14:27 IST)
के अनुसार पांचवां खाना विशेष रूप से संतान का होता है। इस खाने को सूर्य का खाना माना जाता है। अब यह देखना होगा कि इस भाव में कौनसा विराजमान है और वह शुभ है या अशुभ। यह जानकर ही उसके उचित उपाय किए जा सकते हैं। यहां इस संबंध में सामान्य जानकारी दी जा रही है।

1.सूर्य : इस भाव में यदि सूर्य है और वह शुभ है तो संतान के गर्भ में आते ही व्यक्ति को शुभ फल मिलना प्रारंभ हो जाते हैं। संतान जन्म से ही भाग्यवान होती है और माता पिता को सुख देती है। ऐसी संतान पर जितना खर्च करोगे उतना ही शुभ और सुख देने वाला होगा। लेकिन यदि यहां सूर्य किसी कारणवश पीड़ित हो रहा है तो वैचारिक मतभेद के कारण बच्चे माता पिता से दूर हो जाते हैं।


2. चंद्र : इस भाव में चंद्र है और शुभ है तो संतान का पूर्ण सुख मिलेगा। उसकी शिक्षा अच्छी होगी। ऐसे में व्यक्ति जितना जनसेवी होगा बच्चे का भविष्‍य उतना उज्जवल होगा। लेकिन यदि चंद्रमा मंदा अर्थात अशुभ हो रहा है तो नहीं देगी। ऐसे में बरसात का जल एक बोतल में भरकर घर में रखेंगे तो अशुभ फल नहीं मिलेंगे।

3. मंगल : इस भाव में यदि मंगल शुभ होकर विराजमान है तो संतान पराक्रमी और साहसी होगी। ऐसे व्यक्ति को शुत्र का भय नहीं रह जाता है। लेकिन यदि मंगल मंदा है तो संतान क्रूर निकल सकती है या नहीं होगी। ऐसे में व्यक्ति को लकड़ी के पलंग पर सोना चाहिए और उस पलंग के चारों पायों में तांबे की कील ठोक कर रखनी चाहिए। हनुमान चालीसा का पाठ करते रहना चाहिए।


4. बुध : इस भाव में बुध यदि शुभ होकर विराजमान है तो संतान बुद्धिमान और गुणवान निकलेगी। उच्च शिक्षा प्राप्त करेगी और यदि व्यक्ति ऐसे में किसी लाल किताब के विशेषज्ञ से पूछकर चांदी धारण करता है तो यह संतान के लिए और भी ज्यादा लाभप्रद होगा। यदि बुध अशुभ हो रहा है तो व्यक्ति को अकारण विवादों में नहीं उलझना चाहिए अन्यथा संतान से मतभेद होगा और संतान का करियर समाप्त हो जाएगा। बुध के उपाय करना चाहिए।

5. बृहस्पति : यदि इस भाव में बृहस्पति शुभ स्थिति में है तो संतान के जन्म लेते ही व्यक्ति का भाग्य खुल जाता है और जातक सफलता के शिखर पर पहुंच जाता है। संतान बुद्धिमान और नेक निकलती है। लेकिन यदि गुरु मंदा है तो ऐसा नहीं होता है। ऐसे में बृहस्पति के उपाय करना चाहिए। उल्लेखनीय है‍ कि लाल किताब में किसी भी ग्रह का उपाय दूसरे ग्रह के उपाय से होता है। जैसे राहु का उपाय बृहस्पति के उपाय करने से होता है।

6. शुक्र : इस भाव या खाने में यदि शुक्र शुभ स्थिति में विराजमान है तो संतान का जन्म होते ही आर्थिक तंगी खत्म हो जाती है। ऐसे में यदि जातक अच्छे चरित्र का है तो संतान प्रसिद्ध और धनवान होगी। यदि ऐसा नहीं है तो संतान के जन्म से सुख मिलेगा लेकिन संतान को सुख नहीं मिलेगा। यदि इस भाव में शुक्र मंदा है तो शुक्रवार के दिन दूध से स्नान करना चाहिए।


7. शनि : यदि इस भाव में शनि शुभ है तो संतान अपनी मेहनत से ही उन्नति करती है। लेकिन यदि शनि मंदा है तो संतान के होने में ही कष्ट होता है। हो जाती है तो संतान से दुख मिलता है खासकर कन्या से कष्ट पाता है। इसके लिए जातक को मंदिर में 10 बादाम चढ़ाने चाहिए और उसमें से 5 बादाम वापस घर में लाकर रखना चाहिए।

8. राहु : इस भाव में राहु होने संतान सुख विलंब से मिलता है या नहीं मिलता है। अगर राहु शुभ स्थिति में है तो ही संतान सुख मिलता है। लेकिन राहु मंदा है तो यदि संतान हो भी जाए तो व्यक्ति को अपनी संतान के होने का उत्सव नहीं मनाना चाहिए और उसका जन्मदिन भी नहीं मनाना चाहिए। अगर संतान सुख में बाधा आ रही हो तो जातक को अपनी पत्नी से दुबारा शादी करनी चाहिए।


9. केतु : यदि इस भाव में केतु शुभ है तो संतान के जन्म के साथ ही व्यक्ति को आकस्मिक लाभ मिलना शुरू हो जाता है। लेकिन यदि केतु मंदा है तो जातक को मसूर की दाल का दान करना चाहिए। ऐसा करने से संतान सुख मिलेगा।



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