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Written By WD

सिर ऊंचा कर जीते...

कविता
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हम हैं भारत के बेटे
नहीं वीरता में हैं कम।
सिर ऊंचा कर जीते जग में
काम बड़े करते हैं हम।।

सबकी आंखों के तारे हम
सुंदर सपने बुनते हैं।
हम हैं आशाएं भविष्य की
फूल खुशी के चुनते हैं।।

हमसे ही है देश हमारा
और देश से हम सब हैं।
नाम देश का हो ऊंचा
हम करते वैसे करतब हैं।।

हर मुख पर मुस्कान दिखे
हर आंगन सुख की धूप खिले।
चाह यही है दुनियाभर में
भारत को सम्मान मिले।।

- राजनारायण चौधर
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