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Written By WD

पतंग पर कविता : आसमान में लहराएं

पतंगबाजी

ऐसी एक पतंग बनाएं

जो हमको भी सैर कराए

कितना अच्छा लगे अगर

उड़े पतंग हमें लेकर

पेड़ों से ऊपर पहुंचे

धरती से अंबर पहुंचे

इस छत से उस छत जाएं

आसमान में लहराएं

खाती जाए हिचकोले

उड़न खटोले-सी डोले

डोर थामकर डटे रहें

साथ मित्र के सटे रहें

विजय पताका फहराएं

हम भी सैर कर आएं।



प्रस्तुति : चंद्रकला गंगवाल
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