क्या लंबी खिचेंगी जंग? युद्ध रोकने के लिए ईरान ने रखीं मुश्किल शर्तें
Iran-US Tension: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध को लेकर विरोधाभासी बयान दे रहे हैं, वहीं ईरान ने आक्रामक रुख अपना लिया है। एक तरफ ट्रंप कह रहे हैं कि 'हमने ईरान की जंग जीत ली है', दूसरी तरफ वे यह भी कह रहे हैं कि 'जल्दबाजी में पीछे नहीं हटेंगे। वे काम को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं ताकि भविष्य में दोबारा हमले की नौबत न आए।' यह भी सही है कि ट्रंप को अमेरिका में ही विरोध झेलना पड़ रहा है। विपक्षी दल डेमोक्रेट्स के साथ ही रिपब्लिकन सांसद भी युद्ध को रोकने के लिए ट्रंप की कानूनी घेराबंदी कर रहे हैं।
ईरान हुआ और आक्रामक
अमेरिका और इजराइल की उम्मीदों के विपरीत ईरान ने आक्रामक रुख अपना लिया है। ईरान ने युद्ध रोकने के लिए प्रमुख रूप से तीन शर्तें रखी हैं। उसका कहना है कि यह युद्ध जायोनी शासन (इजराइल) और अमेरिका द्वारा शुरू किया गया है। इस युद्ध को तभी रोका जा सकता है, जब उसकी शर्तें पूरी की जाएं। हालांकि ऐसा लगता नहीं कि ट्रंप ईरान की बात मानेंगे, खासकर हर्जाना देने की तो बिलकुल भी नहीं। आइए जानते हैं आखिर क्या हैं ईरान की तीन प्रमुख शर्तें-
ईरान के वैध अधिकारों की मान्यता : ईरान ने मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और उसके विरोधी पक्ष ईरान के संप्रभु अधिकारों को स्वीकार करें। इसमें उनके परमाणु कार्यक्रम के शांतिपूर्ण उपयोग के अधिकार और क्षेत्रीय सुरक्षा में उनकी भूमिका को मान्यता देना शामिल है। हालांकि अमेरिका और इजराइल को ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ही आपत्ति है।
हर्जाने का भुगतान : ईरान ने 28 फरवरी, 2026 से शुरू हुए हमलों के दौरान हुए भारी नुकसान के लिए वित्तीय मुआवजे की मांग की है। इसमें सैन्य ठिकानों, बुनियादी ढांचे की क्षति और नागरिक हताहतों के लिए हर्जाना शामिल है। साथ ही, ईरान लंबे समय से लगे आर्थिक प्रतिबंधों से हुए नुकसान की भरपाई भी चाहता है।
भविष्य के हमलों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गारंटी : तेहरान ने साफ किया है कि किसी भी युद्धविराम का तब तक कोई मतलब नहीं है जब तक कि एक ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी न दी जाए कि भविष्य में उस पर फिर से हमला नहीं होगा। उनका कहना है कि बिना सुरक्षा गारंटी के सीजफायर केवल अस्थायी होगा।
होर्मुज पर ईरान का पहरा
उल्लेखनीय है कि ताजा तनाव 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए बड़े हवाई हमलों के बाद शुरू हुआ। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस बीच, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को रोक दिया है। इससे दुनिया भर में तेल की आपूर्ति बाधित हुई है। इससे दुनिया और तेल और गैस का संकट उत्पन्न हो गया है। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ गई हैं।
अपने ही घर में घिरे ट्रंप
दूसरी ओर, ट्रंप चाहते हैं कि ईरान बिना शर्त आत्मसमर्पण करे, जो कि संभव नहीं लगता। ऐसे में यह युद्ध और लंबा खिंचता दिख रहा है। ट्रंप दो तरह की बातें भी कर रहे हैं। वे एक तरफ यह भी कहते हैं कि ईरान में अब हमले के लिए कुछ नहीं बचा है, वहीं यह भी कहते हैं कि मैं जब तक चाहूंगा युद्ध जारी रहेगा। हालांकि ट्रंप अपने ही देश में घिरे हुए हैं। विपक्षी सांसदों के अलावा उनकी ही पार्टी के सांसद युद्ध का विरोध कर रहे हैं। हालांकि यह उम्मीद कम ही है कि ट्रंप ईरान की शर्तों को मांगेंगे। ऐसी स्थिति में युद्ध लंबे खिंच जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
Edited by: Vrijendra singh Jhala