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Last Updated : सोमवार, 5 जनवरी 2026 (16:19 IST)

दूषित पानी से बीमार बच्‍चे पहुंच रहे चाचा नेहरू अस्‍पताल, गर्भवती ने खोया बच्‍चा, कई कोख पर भी खतरा

भागीरथपुरा में हैजा का अलर्ट, डॉक्‍टरों ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

Indore water
इंदौर में दूषित पानी से एक दंपत्‍ति आरती और रंजित कोरी ने अपना बच्‍चा कोख में ही गवां दिया। इस दंपत्‍ति की दो बेटियां हैं। कई मिन्‍नतों और लंबे वक्‍त के बाद उनके घर में फिर से किलकारी गूंजने वाली थी। उन्‍हें लगा था इस बार उन्‍हें घर का चिराग मिलेगा। लेकिन दूषित पानी से आरती को उल्‍टी दस्‍त हुई और तबीयत खराब हो गई। पहले घर के पास ही क्‍लिनिक पर डॉक्‍टर को दिखाया, बाद में नंदानगर अस्‍प्‍ताल ले गए, लेकिन तब तक दूषित पानी के जहर ने कोख में पल रहे बच्‍चे की जान ले ली।

बुझ गया चिराग : 15 हजार रुपए महीना कमाने वाला रंजित किराये के घर में रहता है, जिसका किराया 2500 रुपए हैं। पत्‍नी को संक्रमण हुआ तो जैसे उनके परिवार पर दुखों का पहाड टूट गया। एक अस्‍पताल से दूसरे और फिर तीसरे अस्‍पताल तक जांचें और दवाइयों के खर्च के तले वो पूरी तरह से दब गया। पहले ही कर्जा ले रखा है और अब यह मुसीबत से वे पूरी तरह से टूट गए हैं।

गर्भ में पल रहे 250 से ज्‍यादा बच्‍चों पर खतरा : बता दें कि भागीरथपुरा में 17 से ज्‍यादा आशा कार्यकर्ताओं की टीम काम कर रही हैं। हर आशा कार्यकर्ता के हिस्‍से में 30 से 35 गर्भवती महिलाओं की देखभाल का जिम्‍मा है। यह सारी गर्भवती महिलाएं भागीरथपुरा इलाके में रहती हैं, जहां दूषित पानी से संक्रमण फैला है और अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में 250 से 300 गर्भवती महिलाओं की कोख पर दूषित पानी का खतरा मंडरा रहा है। अगर समय रहते इनकी जांचें नहीं हुई और इलाज नहीं मिला तो इनके गर्भ में पल रहे बच्‍चों पर संकट आ सकता है।

चाचा नेहरू में आ रहे मासूम बच्‍चे : बता दें कि इंदौर के चाचा नेहरू अस्‍पताल में ऐसे बच्‍चों की संख्‍या बढ रही है जो बीमार होकर यहां पहुंच रहे हैं। इनमें से कई उल्‍टी दस्‍त के मामले हैं। ज्‍यादातर मामलों में मांओं ने अपने बच्‍चों के दूध में पानी मिलाकर पिलाया था। ऐसे में वे भी कहीं न कहीं संक्रमण का शिकार हुए हैं। कई बच्‍चे चाचा नेहरू अस्‍प्‍ताल में भर्ती हैं।

हैजा का अलर्ट, डॉक्‍टरों ने मांगी मदद : इंदौर भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जलापूर्ति के कारण हैजा (कॉलरा) जैसी गंभीर जलजनित बीमारी के संभावित प्रकोप को लेकर चिंता बढ़ गई है। वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक एवं जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. एके द्विवेदी ने इस संबंध में प्रशासन को सतर्क करते हुए जिला कलेक्टर, इंदौर संभागायुक्त और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। डॉ. ए. के. द्विवेदी ने कहा कि यदि समय रहते प्रशासनिक, चिकित्सकीय, आयुष और जनस्वास्थ्य स्तर पर समन्वित प्रयास किए जाएं, तो हैजा जैसे संभावित प्रकोप को रोका जा सकता है और जनहानि से प्रभावी रूप से बचाव संभव है। उन्होंने जनहित में शीघ्र निर्णय लेने और आवश्यक निर्देश जारी करने की अपील की है।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल
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