पूजा स्थल : कहाँ और क्यों
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पूजा घर में देवी-देवता की मूर्ति का मुँह पूर्व या पश्चिम की ओर होना चाहिए।
घर का भारी सामान तथा स्थायी रूप से रखी जाने वाली वस्तुएँ दक्षिण-नैऋत्य या पश्चिम-नैऋत्य में ही रखें। यह अत्यंत शुभ होता है।
कक्ष में सोते समय सिर पलंग पर दक्षिण दिशा में तथा पैर दक्षिण व पूर्व दिशा को छोड़कर किसी भी अन्य दिशा में रख सकते हैं।
पूर्व दिशा में भी सिर रखकर सोना श्रेष्ठ होता है।
छत पर पानी की टंकी हमेशा दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखें।
वास्तु के अनुसार विद्यार्थियों को हमेशा पूजा गृह में उत्तर-दिशा में बैठकर उत्तर की ओर मुँह करके पूजा करनी चाहिए।
विद्यार्थियों के अलावा घर के दूसरे सदस्यों को पूर्व दिशा में पूर्व की ओर मुँह करके पूजा करनी चाहिए।

