Ganti and ghanta: भारतीय संस्कृति और मंदिर विज्ञान में घंटी का स्थान केवल एक वाद्य यंत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय नाद और चेतना का प्रतीक है। प्राचीन काल में जहाँ मंदिरों में यह भक्ति का माध्यम थी, उपस्थिति की सूचना है। वहीं राजमहलों के द्वार पर लगा 'न्याय का घंटा' राजा और प्रजा के बीच सीधे संवाद का सेतु हुआ करता था।
घंटी और घंटे के 6 विविध स्वरूप:
शास्त्रों और परंपरा के अनुसार इन्हें मुख्य रूप से छह श्रेणियों में बांटा गया है:
1. एक हाथ घंटी: हल्की और छोटी, जिसका उपयोग घरों में दैनिक आरती के लिए होता है।
2. गरुड़ घंटी: यह भी एक हाथ से बजाई जाती है, इसके ऊपरी हिस्से पर भगवान गरुड़ की आकृति होती है।
3. दो हाथ घंटी: पीतल की एक ठोस गोल प्लेट जैसी, जिसे लकड़ी के दंड से ठोककर बजाया जाता है।
4. द्वार या छत घंटी: मंदिर के प्रवेश द्वार पर लटकी मध्यम आकार की घंटियां।
5. महाघंटा: यह आकार में विशाल (5 फुट या अधिक) होता है, जो बड़े मंदिरों या राजप्रासादों में शान का प्रतीक होता है।
6. दो हाथ घंटा: यह 'दो हाथ घंटी' का विराट रूप है, जिसे बजाने के लिए भारी दंड की आवश्यकता होती है।
न्याय का प्रतीक: राजमहल का घंटा:
प्राचीन काल में राजमहलों के प्रवेश द्वार पर एक विशाल घंटा न्याय के लिए सुरक्षित रहता था। यदि किसी नागरिक को न्याय न मिले, तो वह इस घंटे को बजाकर सीधे राजा से गुहार लगा सकता था। इसकी गूंज सुनते ही राजा स्वयं उपस्थित होकर पीड़ित की समस्या का समाधान करते थे। प्रभु श्रीराम के समय से लेकर राजा हर्षवर्धन, महाराजा छत्रपति शिवाजी तक यह परंपरा चली आ रही थी। अंग्रेज काल में भी कई राजा इस परंपरा का पालन करते रहते थे।
घंटी बजाने के पीछे का गहरा उद्देश्य
1. देवताओं की उपस्थिति: मान्यता है कि घंटी बजाने से मंदिर की मूर्तियों में चेतना जाग्रत होती है और आपकी 'आध्यात्मिक हाजिरी' स्वीकार की जाती है।
2. सृष्टि का आदि नाद: घंटी की ध्वनि उसी 'ॐ' (ओंकार) नाद का प्रतीक है, जो सृष्टि के प्रारंभ में गूँजी थी। माना जाता है कि प्रलय काल में भी ऐसा ही नाद प्रकट होगा।
3. नकारात्मकता का नाश: जहाँ नियमित घंटी बजती है, वहाँ से नकारात्मक ऊर्जा दूर भागती है और समृद्धि के द्वार खुलते हैं। स्कंद पुराण के अनुसार, घंटी की ध्वनि मनुष्य के सौ जन्मों के पापों को क्षीण करने की क्षमता रखती है।
ध्वनि और वास्तु का विज्ञान
1. सूक्ष्म जीवों का अंत: घंटी बजने से वायुमंडल में तीव्र कंपन होता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह कंपन आसपास के जीवाणु, विषाणु और सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट कर वातावरण को शुद्ध कर देता है।
2. धातुओं का मिश्रण: बड़ा घंटा कैडमियम, सीसा, तांबा, जस्ता, निकल और मैंगनीज जैसी धातुओं के विशेष अनुपात से बनता है। इसकी प्रतिध्वनि कम से कम 7 सेकंड तक गूँजती है, जो मानव शरीर के सात चक्रों को सक्रिय कर मन को तुरंत एकाग्र कर देती है।
घंटी बजाने के अनिवार्य नियम
मंदिर की मर्यादा बनाए रखने के लिए कुछ नियमों का पालन आवश्यक है:
1. प्रवेश और आरती: घंटी केवल मंदिर में प्रवेश करते समय या आरती के दौरान ही बजानी चाहिए।
2. निकासी के समय निषेध: मंदिर से बाहर निकलते समय घंटी बजाना वर्जित है, क्योंकि यह शिष्टाचार और नियम के विरुद्ध माना जाता है।
3. संयम: घंटी को बहुत जोर से या अनियंत्रित होकर नहीं बजाना चाहिए; दो या तीन बार की स्पष्ट ध्वनि पर्याप्त है।