short story | तसल्ली की परिभाषा
ज्योति जैन
सुबक-सुबक कर रो रही अपनी कामवाली बाई से मालकिन ने सहानुभूति के साथ पूछा - 'क्या बात है शकुंतला?' कुछ मत पूछो बाई साब। मेरे तो करम ही फूटे हैं। मेरा मरद... वो दूसरी के साथ...।'
उसका तो महीनों से दूसरी औरत के साथ संबंध था, आज क्या नई बात हो गई? मेमसाब ने उसे बीच में ही टोका। कल रात को वो उस औरत के साथ गाँव चला गया बाई साब!
शकुंतला सुबक कर बोली - 'भले ही जगे-जगे मुँह मारता था, पर मेरे को तसल्ली थी कि मेरा आदमी रहता तो मेरे साथ है।'
बाई साब अवाक, उसकी तसल्ली की परिभाषा समझने की कोशिश कर रही थी।
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उसका तो महीनों से दूसरी औरत के साथ संबंध था, आज क्या नई बात हो गई? मेमसाब ने उसे बीच में ही टोका। कल रात को वो उस औरत के साथ गाँव चला गया बाई साब!
शकुंतला सुबक कर बोली - 'भले ही जगे-जगे मुँह मारता था, पर मेरे को तसल्ली थी कि मेरा आदमी रहता तो मेरे साथ है।'
बाई साब अवाक, उसकी तसल्ली की परिभाषा समझने की कोशिश कर रही थी।
