स्पर्श प्रेम का
ज्योति जैन
प्रेम का प्रथम स्पर्शउतना ही पावन व निर्मलजैसे कुएं काबकुल-तपती धूप में प्रदान करताशीतलता-सौंधी महक लिए।जब मिलता तो लगेबहुत कमलेकिन बढते वक्त के साथ भर जाता लबालबपरिपूर्ण हो जाता कुआंहमेशा प्यास बुझाने के लिएकभी न कम होने के लिए।प्रेम का प्रथम स्पर्शमानो कुएं का बकुल।