गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026
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Written By ND

सूर्योदय हो रहा है

-शमशेर बहादुर सिंह

सूर्योदय
WD
प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे
भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका
(अभी गीला पड़ा है)

बहुत काली सिल जरा से लाल केसर से
कि जैसे घुल गई हो
स्लेट पर या लाल खड़िया चाक
मल दी हो किसी ने
नील झील में या किसी की
गौर झिलमिल देह जैसे हिल रही हो।

और...

जादू टूटता है इस उषा का अब
सूर्योदय हो रहा है।