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Written By WD

सुस्ताई हुई छाँव

काव्य-संसार

कवि
सिद्धेश्वर सिं
ND
* गर्मियाँ शुरू हो गई हैं
अब सहा नहीं जाता घाम
उड़ने लगी है धूल
जब भी देखता हूँ
किसी पेड़ के तले
सुस्ताई हुई छाँव को
सहसा याद आ जाता है तुम्हारा नाम।
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WD