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Written By स्मृति आदित्य

श्वेत-पीत चंपा

फाल्गुनी

फाल्गुनी
ND
हरी कच पत्तियों के बीच
खिलता
श्वेत-पीत चंपा
जैसे
किसी ने
प्रेयसी के
अचानक सामने आकर
चौंका दिया हो
चमकता चांद सा चेहरा।