वह औरत उस छोटी खिड़की से
उमाशंकर चौधरी
जबकि इस बड़े शहर में बड़े-बड़े घर हैं औरइन बड़े-बड़े घरों में हैं बड़ी-बड़ी खिड़कियाँ, तबउसके हिस्से इस छोटे से घर मेंछोटी खिड़की आई है।छोटी खिड़की,जिससे देखता है छोटा आसमानचंद तारे और बादल का एक टुकड़ा।वह औरत उस छोटी खिड़की सेदेखती है गली में, उस सब्जी वाले कोदेती है आवाज गली में खेलते अपने बच्चों कोऔर करती है इंतजार काम पर सेअपने पति के लौटने का।छोटी खिड़की कभी बंद नहीं होती।साभार : वागर्थ