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वतन के दुख भरे हालात हैं
रोहित जैन आँख में आँसू भरे हैं दिल में ये जज़्बात हैंक्यों मेरे प्यारे वतन के दुख भरे हालात हैंकोई कुछ करता नहीं है कोई कुछ कहता नहींक्यों ये सन्नाटा निहाँ है ये भी कोई बात हैभीख माँगें औरतें, बच्चे सड़क पर सो रहें क्या यही जमहूरियत की मुल्क़ को सौग़ात हैसीने छलनी हैं ज़मीं के फ़िज़ाँ लहूलूहान हैआसमानों से मुसलसल खून की बरसात हैजल रही हैं बस्तियाँ ड़ूबी हुई हैं कश्तियाँजिस तरफ़ देखो यहाँ फ़ैले हुए ज़ुल्मात हैंज़िन्दा लाशें चल रही हैं और सुलगते हैं बदनकौन बोलेगा यहाँ ये आदमी की जात हैआदमीयत ज़ुल्म की चक्की में पिसती जा रहीअपनी खबर मिलती नहीं दुनिया की क्या औक़ात है
जिस तरफ़ देखो गुनहगारों की महफ़िल है जमाआह मौसीक़ी बनी है अश्क़ के नग़मात हैंइक अंधेरा सा उतरता है दिलों तक आँख सेअब सहर होती नहीं है सिर्फ़ छाई रात हैझोंपड़ों गलियों बियाबानों में दरियाओं में खूनपुरसुकूँ दैरो हरम तक में यही हालात हैं
खून से रंगीं फ़िज़ाएँ खून-बू लाती हवासुर्ख़ नदियाँ हैं यहाँ पर सुर्ख़ हर निशात हैखून उबलेगा नहीं तो खून टपकेगा तेराअब तो यल्ग़ारे बगावत से ही बननी बात हैकिस कदर बेशर्म बैठे हैं ये सारे आदमीक्या दिले 'रोहित' में ही बस ऐसे अहसासात हैं?